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| छिंदवाड़ा; अब खाद बिना ई-टोकन नहीं! किसानों के लिए नया सिस्टम लागू, CSC संचालकों को दी गई खास ट्रेनिंग Aajtak24 News |
छिंदवाड़ा - जिले में किसानों को उर्वरक वितरण की प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल बनाने की दिशा में प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। कलेक्टर हरेंद्र नारायन के निर्देशन में कलेक्टर कार्यालय सभाकक्ष में कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) संचालकों के लिए ई-विकास प्रणाली पोर्टल का व्यावहारिक प्रशिक्षण आयोजित किया गया। शासन के निर्देशानुसार 1 अप्रैल 2026 से पूरे प्रदेश में उर्वरकों का शत-प्रतिशत वितरण ई-विकास प्रणाली के माध्यम से किया जाना है। इसी को ध्यान में रखते हुए संशोधित ई-विकास पोर्टल के संचालन, ई-टोकन बुकिंग और किसानों की ऑनलाइन सहायता को लेकर प्रशिक्षण दिया गया।
प्रशिक्षण में बताया गया कि जिन किसानों को मोबाइल के जरिए ई-टोकन बुक करने में परेशानी होगी, वे अपने नजदीकी सीएससी केंद्र जाकर टोकन बुक करा सकेंगे। शासन द्वारा प्रति ई-टोकन बुकिंग के लिए 15 रुपये शुल्क तय किया गया है। हालांकि सेवा सहकारी समितियों, मार्कफेड गोदामों और निजी विक्रय केंद्रों पर किसानों के लिए ई-टोकन पंजीयन निःशुल्क किया जाएगा। कार्यक्रम में करीब 150 सीएससी संचालकों ने हिस्सा लिया। प्रशिक्षण के दौरान बटाईदार किसानों, वृद्ध और दिव्यांग किसानों तथा मृत किसानों के नाम पर टोकन प्रक्रिया जैसी जटिल स्थितियों पर विशेष जानकारी दी गई। सिकमी किसानों के पंजीयन के लिए एग्री स्टैक पोर्टल के ऑथराइजेशन मॉड्यूल की भी जानकारी साझा की गई।
अधिकारियों ने सीएससी संचालकों को निर्देश दिए कि वे किसानों को सही उर्वरक चयन और नजदीकी विक्रेताओं से समय पर टोकन बुकिंग में सहयोग करें ताकि खरीफ सीजन में किसानों को परेशानी न हो। यह प्रशिक्षण उपसंचालक कृषि जितेंद्र कुमार सिंह, ई-गवर्नेंस प्रबंधक अतुल शर्मा के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में सहायक संचालक कृषि धीरज ठाकुर सहित कृषि विभाग और निजी उर्वरक विक्रेताओं के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- उर्वरक वितरण को पूरी तरह डिजिटल बनाने की तैयारी की जा रही है, लेकिन क्या प्रशासन ने यह आकलन किया है कि ग्रामीण क्षेत्रों के कितने किसान स्मार्टफोन और इंटरनेट सुविधा से वंचित हैं?
- ई-टोकन बुकिंग के लिए 15 रुपये शुल्क तय किया गया है, तो क्या यह छोटे और गरीब किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं होगा?
- यदि सर्वर, नेटवर्क या पोर्टल में तकनीकी समस्या आती है, तो खरीफ सीजन में किसानों को खाद वितरण बाधित होने से बचाने के लिए क्या वैकल्पिक व्यवस्था तैयार की गई है?
