![]() |
| अनुपपुर में सीईओ ने नल-जल और वाटरशेड योजनाओं की जमीनी हकीकत परखी |
अनुपपुर - ग्रामीण क्षेत्रों में जल संकट और सिंचाई की चुनौतियों के बीच जिला पंचायत प्रशासन अब योजनाओं की जमीनी हकीकत पर फोकस करता नजर आ रहा है। जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी अर्चना कुमारी ने जनपद पंचायत पुष्पराजगढ़ क्षेत्र में नल-जल योजना और वाटरशेड परियोजनाओं का निरीक्षण कर विकास कार्यों की गुणवत्ता और उपयोगिता का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान सीईओ ने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा संचालित नल-जल योजना का अवलोकन किया और तहसील टोला में बनाए गए स्टाफ डेम की गुणवत्ता, जल संरक्षण क्षमता और उसके उपयोग का परीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जल संरक्षण से जुड़े कार्य केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि ग्रामीणों को वास्तविक लाभ भी मिलना चाहिए।
सीईओ अर्चना कुमारी ने ग्राम नादपुर में संचालित सीएससी सेंटर का भी निरीक्षण किया और वहां दी जा रही सेवाओं की जानकारी ली। साथ ही प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत चल रहे वाटरशेड कार्यों की प्रगति, गुणवत्ता और समय सीमा की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान उन्होंने वाटरशेड योजना अंतर्गत उद्यानिकी गतिविधियों के तहत टमाटर उत्पादन कार्य का भी अवलोकन किया। इस दौरान हितग्राहियों से सीधे बातचीत कर उत्पादन, लाभ और योजनाओं के प्रभाव के बारे में जानकारी ली गई।
निरीक्षण में जनपद पंचायत पुष्पराजगढ़ के मुख्य कार्यपालन अधिकारी गणेश कुमार पांडेय, वाटरशेड परियोजना अधिकारी राजेन्द्र कोसरिया, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की उप यंत्री नीलिमा सिंह, सहायक यंत्री महत्वाकांक्षी सिंह और एसबीएम ब्लॉक समन्वयक पुष्पेंद्र तिवारी सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार बढ़ते जल संकट के बीच प्रशासन की यह कवायद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हालांकि सवाल यह भी है कि निरीक्षण के बाद क्या योजनाओं की गति और गुणवत्ता में वास्तव में सुधार दिखाई देगा या नहीं।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- जिले में पहले से बनी कई नल-जल योजनाएं बंद या अधूरी पड़ी हैं, तो क्या इस निरीक्षण के बाद उनकी जवाबदेही भी तय की जाएगी?
- वाटरशेड और जल संरक्षण योजनाओं पर करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद कई गांवों में पानी की समस्या क्यों बनी हुई है?
- क्या प्रशासन इन परियोजनाओं की गुणवत्ता जांच के लिए किसी स्वतंत्र तकनीकी एजेंसी से ऑडिट कराने पर विचार कर रहा है?
