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| “गेहूं खरीदी में गड़बड़ी हुई तो नपेंगे अफसर! कलेक्टर ने मैदान में उतार दी पूरी राजस्व टीम” Aajtak24 News |
शिवपुरी - जिले में गेहूं उपार्जन व्यवस्था को लेकर प्रशासन अब पूरी तरह एक्शन मोड में दिखाई दे रहा है। किसानों की शिकायतों और खरीदी केंद्रों पर संभावित अनियमितताओं को देखते हुए कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट अर्पित वर्मा ने सभी राजस्व अधिकारियों को सख्त निर्देश जारी किए हैं कि उपार्जन व्यवस्था की लगातार निगरानी की जाए और किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त न की जाए। कलेक्टर के निर्देश के बाद जिलेभर में राजस्व अधिकारियों ने खरीदी केंद्रों का निरीक्षण शुरू कर दिया है। डिप्टी कलेक्टर अजय शर्मा ने बैराड़ उपार्जन केंद्र का जायजा लिया, जबकि डिप्टी कलेक्टर शिवदयाल धाकड़ ने मलावनी और कमालपुर पिछोर के गेहूं खरीदी केंद्रों का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर किसानों से बातचीत की और व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति समझने की कोशिश की।
निरीक्षण के दौरान टोकन वितरण प्रणाली, बारदाने की उपलब्धता, गेहूं के परिवहन और किसानों को भुगतान की प्रक्रिया की जानकारी ली गई। इसके अलावा खरीदे जा रहे गेहूं की गुणवत्ता की भी जांच की गई ताकि मानक से कम गुणवत्ता वाले अनाज की खरीदी या किसी प्रकार की हेराफेरी न हो सके। प्रशासन ने खरीदी केंद्रों पर किसानों के लिए मूलभूत सुविधाओं को लेकर भी सख्ती दिखाई है। अधिकारियों ने पेयजल, छाया और बैठने की व्यवस्था की स्थिति का भी निरीक्षण किया। गर्मी के मौसम को देखते हुए किसानों को किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए व्यवस्थाएं दुरुस्त रखने के निर्देश दिए गए हैं।
कलेक्टर अर्पित वर्मा स्वयं भी उपार्जन केंद्रों की मॉनिटरिंग कर रहे हैं। उन्होंने साफ कहा है कि यदि किसी केंद्र पर गड़बड़ी, लापरवाही या किसानों के साथ दुर्व्यवहार की शिकायत मिली तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का दावा है कि खरीदी प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए लगातार निगरानी की जा रही है। हालांकि हर साल गेहूं खरीदी के दौरान टोकन में देरी, भुगतान अटकने, बारदाने की कमी और परिवहन में भ्रष्टाचार जैसी शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसे में इस बार प्रशासन की सख्ती जमीनी स्तर पर कितना असर दिखाती है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- यदि उपार्जन व्यवस्था पूरी तरह नियंत्रण में है, तो हर साल किसानों को टोकन देरी, भुगतान अटकने और बारदाने की कमी जैसी समस्याओं का सामना क्यों करना पड़ता है?
- कलेक्टर ने अनियमितता पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है, लेकिन पिछले वर्षों में खरीदी केंद्रों पर गड़बड़ी करने वाले कितने अधिकारियों या कर्मचारियों पर वास्तव में कार्रवाई हुई?
- प्रशासन लगातार निरीक्षण की बात कर रहा है, फिर भी कई किसान खुले में घंटों इंतजार करने और मूलभूत सुविधाओं की कमी की शिकायत क्यों कर रहे हैं?
