निवाड़ी में आदिवासी इलाकों के लिए प्रशासन का बड़ा डिजिटल दांव Aajtak24 News

निवाड़ी में आदिवासी इलाकों के लिए प्रशासन का बड़ा डिजिटल दांव Aajtak24 News

निवाड़ी - आदिवासी समुदाय तक सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे पहुंचाने और ग्रामीणों की शिकायतों का त्वरित समाधान सुनिश्चित करने के लिए निवाड़ी प्रशासन ने बड़ा अभियान शुरू किया है। पृथ्वीपुर स्थित सांदीपनी उच्च माध्यमिक विद्यालय में आयोजित समीक्षा बैठक में कलेक्टर जमुना भिड़े ने ‘धरती आबा ग्राम जनजातीय उत्कर्ष अभियान’ और आकांक्षी विकासखंड योजना की प्रगति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि आकांक्षी विकासखंड पृथ्वीपुर की 35 ग्राम पंचायतों के 42 गांवों में विशेष अभियान चलाकर अनुसूचित जनजाति समुदाय को 28 विभागों की योजनाओं का लाभ पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। प्रशासन ने इसके लिए एक माह की विशेष समयसीमा तय की है।

कलेक्टर जमुना भिड़े ने कहा कि स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा, कृषि, महिला एवं बाल विकास तथा मूलभूत सुविधाओं से जुड़े मामलों में शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करना प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि योजनाओं का लाभ वास्तविक पात्र हितग्राहियों तक पहुंचे, यह सुनिश्चित किया जाए। बैठक में प्रशासन की ओर से एक बड़ा डिजिटल नवाचार भी घोषित किया गया। जानकारी दी गई कि अगले मंगलवार से पृथ्वीपुर ब्लॉक की सभी ग्राम पंचायतें वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जिला स्तरीय ऑनलाइन जनसुनवाई से सीधे जुड़ेंगी। इससे ग्रामीणों को अपनी शिकायत लेकर जिला मुख्यालय तक नहीं आना पड़ेगा और गांव से ही समस्याओं का समाधान कराने का प्रयास किया जाएगा।

प्रशासन का मानना है कि इस व्यवस्था से ग्रामीण क्षेत्रों में शिकायत निवारण प्रक्रिया अधिक तेज और पारदर्शी बनेगी। बैठक के दौरान 12वीं बोर्ड परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर जिले का नाम रोशन करने वाली छात्राओं को भी सम्मानित किया गया। कलेक्टर जमुना भिड़े ने छात्राओं को सम्मानित करते हुए कहा कि मेहनत और अनुशासन से हर लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। कार्यक्रम में रोजगार सहायक, आशा सुपरवाइजर, महिला एवं बाल विकास विभाग, जनजातीय कार्य विभाग सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी, विद्यालय के शिक्षक और अभिभावक उपस्थित रहे।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. यदि अब आदिवासी क्षेत्रों में योजनाओं की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए विशेष अभियान चलाना पड़ रहा है, तो क्या पहले इन गांवों तक योजनाएं प्रभावी तरीके से नहीं पहुंच पा रही थीं?
  2. ऑनलाइन जनसुनवाई की नई व्यवस्था शुरू की जा रही है, लेकिन जिन गांवों में इंटरनेट और तकनीकी संसाधनों की कमी है, वहां यह व्यवस्था कितनी व्यवहारिक साबित होगी?
  3. 28 विभागों की योजनाओं का लाभ देने का लक्ष्य तय किया गया है, तो क्या प्रशासन यह सार्वजनिक करेगा कि अब तक कितने पात्र आदिवासी परिवार इन योजनाओं से वंचित रहे हैं और जिम्मेदारी किसकी है?

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