बलरामपुर; जहां दफ्तर नहीं पहुंचते थे, वहां पहुंचा प्रशासन: जनजातीय गरिमा शिविरों से बदली दूरस्थ गांवों की तस्वीर Aajtak24 News

बलरामपुर; जहां दफ्तर नहीं पहुंचते थे, वहां पहुंचा प्रशासन: जनजातीय गरिमा शिविरों से बदली दूरस्थ गांवों की तस्वीर Aajtak24 News

बलरामपुर - दूरस्थ जनजातीय क्षेत्रों तक शासन की योजनाओं को पहुंचाने के उद्देश्य से चलाए जा रहे “जन भागीदारी–सबसे दूर, सबसे पहले” अभियान के अंतर्गत आयोजित जनजातीय गरिमा उत्सव शिविरों ने कई ग्रामीण परिवारों को राहत पहुंचाई। शिविरों के माध्यम से स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा, खाद्य, कृषि और दस्तावेजी सेवाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध कराई गईं। इसी क्रम में विकासखंड राजपुर के पतरापारा तथा विकासखंड रामचंद्रपुर के बराहनगर में शिविर आयोजित किए गए, जहां बड़ी संख्या में विशेष पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवा समुदाय के परिवार शामिल हुए। पतरापारा शिविर में ग्राम पतरापारा, डिगनगर, अमदरी, चंद्रगढ़ और करजी से पहुंचे ग्रामीणों की समस्याएं सुनकर मौके पर समाधान की प्रक्रिया शुरू की गई। जनपद पंचायत सीईओ संजय दुबे के नेतृत्व में आयोजित शिविर में विभिन्न विभागों ने योजनाओं की जानकारी और सेवाएं उपलब्ध कराईं।

स्वास्थ्य विभाग द्वारा 71 ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया तथा 21 लोगों के आयुष्मान कार्ड बनाए गए। इसके अलावा 11 किसानों का एग्री स्टैक पंजीयन किया गया। वहीं बराहनगर शिविर में जनपद सीईओ रणवीर साय के नेतृत्व में कई विभागों ने सेवाएं दीं। शिविर में राजस्व विभाग द्वारा जाति, आय और निवास प्रमाण पत्र जारी किए गए तथा जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र भी वितरित किए गए। खाद्य विभाग द्वारा 37 हितग्राहियों को राशन कार्ड दिए गए, स्वास्थ्य विभाग ने 157 ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण किया और आयुष्मान कार्ड भी बनाए। पशुधन विकास विभाग ने 68 पशुपालकों को दवाएं वितरित कीं तथा श्रम विभाग ने श्रम कार्ड बनाए।

सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के तहत पेंशन और परिवार सहायता योजना का लाभ भी दिया गया। कृषि विभाग ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि से जुड़े प्रकरणों में सुधार, एग्री स्टैक पंजीयन और मृदा परीक्षण जैसे कार्य किए। यह अभियान भारत सरकार जनजातीय कार्य मंत्रालय के निर्देशानुसार कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी के मार्गदर्शन और जिला पंचायत सीईओ नयनतारा सिंह तोमर के नेतृत्व में संचालित किया जा रहा है।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

1. शिविरों में लाभ वितरण हुआ, लेकिन कितने लाभार्थियों को पहली बार और कितनों को लंबित मामलों में राहत मिली—क्या इसका अलग डेटा उपलब्ध है?

2. जिन दूरस्थ क्षेत्रों तक प्रशासन शिविरों के माध्यम से पहुंच रहा है, वहां नियमित सरकारी सेवाओं की स्थायी व्यवस्था कब तक सुनिश्चित होगी?

3. पहाड़ी कोरवा जैसे विशेष पिछड़े समुदायों के लिए योजनाओं का लाभ देने के बाद उनकी वास्तविक सामाजिक और आर्थिक स्थिति में बदलाव को कैसे मापा जाएगा?

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