दमोह; खाते में पैसा, फिर भी नहीं मिल रही नकदी? कलेक्टर की बैठक में बैंकिंग व्यवस्था पर सख्त चेतावनी Aajtak24 News

दमोह; खाते में पैसा, फिर भी नहीं मिल रही नकदी? कलेक्टर की बैठक में बैंकिंग व्यवस्था पर सख्त चेतावनी Aajtak24 News

दमोह - जिले में किसानों और वृद्धजनों को बैंकिंग सेवाओं में आ रही परेशानियों को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने बैंकर्स, बैंक मित्र (बीसी) और कियोस्क संचालकों की बैठक लेकर स्पष्ट संदेश दिया कि खातों में राशि होने के बावजूद लोगों को नकदी नहीं मिलना स्वीकार नहीं किया जाएगा। बैठक में कलेक्टर ने बताया कि क्षेत्रीय भ्रमण के दौरान यह सामने आया कि कई किसान खाते में पैसा होने के बावजूद बैंक से समय पर नकद राशि प्राप्त नहीं कर पा रहे हैं। इसका असर शादी-विवाह, इलाज और अन्य जरूरी कार्यों पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि किसानों को उनकी आवश्यकता के अनुसार समय पर नकदी उपलब्ध कराना बैंकिंग तंत्र की जिम्मेदारी है।

बैठक में वृद्धजनों से जुड़ी शिकायतों पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की गई। प्रशासन के अनुसार कुछ कियोस्क केंद्रों पर पेंशन निकालने आए वृद्धजनों से अवैध रूप से पैसे मांगने या राशि में कटौती की शिकायतें मिली थीं। इस पर कलेक्टर ने सख्त निर्देश देते हुए कहा कि वृद्धजन सम्मान के पात्र हैं और उनके साथ किसी भी प्रकार की आर्थिक अनियमितता या अनुचित व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कलेक्टर ने बैंक अधिकारियों से कहा कि यदि नकदी उपलब्धता में किसी प्रकार की समस्या है तो तत्काल भारतीय रिजर्व बैंक के वरिष्ठ अधिकारियों से समन्वय स्थापित किया जाए। उन्होंने आश्वस्त किया कि प्रशासन आवश्यक सहयोग देगा, लेकिन यदि किसी किसान, वृद्धजन या आम नागरिक से कमीशन या अतिरिक्त राशि लेने की शिकायत मिली तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

बैठक के दौरान सभी बैंकर्स और कियोस्क संचालकों को शपथ भी दिलाई गई कि वे निर्धारित नियमों के अनुसार कार्य करेंगे और किसी भी हितग्राही से अतिरिक्त राशि की मांग नहीं करेंगे। इसके अलावा सोलर योजनाओं से जुड़े प्रकरणों को प्राथमिकता से निपटाने, बैंक स्तर पर अनावश्यक अस्वीकृति से बचने तथा रोजगारमूलक और हितग्राही योजनाओं में प्रगति लाने के निर्देश दिए गए। साथ ही बैंक अधिकारियों को सीएम हेल्पलाइन के मामलों का त्वरित निराकरण सुनिश्चित करने को कहा गया।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

1. यदि खातों में पैसा होने के बावजूद किसानों और आमजन को नकदी नहीं मिल रही थी, तो अब तक संबंधित बैंक शाखाओं या कियोस्क संचालकों पर कितनी कार्रवाई की गई और उसका परिणाम क्या रहा?

2. वृद्धजनों से अवैध वसूली और पेंशन कटौती की शिकायतें मिलने की बात कही गई— क्या प्रशासन ने ऐसे मामलों की जांच कर दोषियों की सूची सार्वजनिक करने पर विचार किया है?

3. बैंकर्स और कियोस्क संचालकों को शपथ दिलाई गई, लेकिन क्या भविष्य में निगरानी के लिए कोई शिकायत ट्रैकिंग सिस्टम, औचक निरीक्षण या सामाजिक ऑडिट भी लागू किया जाएगा ताकि यह केवल औपचारिकता बनकर न रह जाए?

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