सुकमा; जहां कभी डर की दस्तक थी, वहां अब इलाज की रोशनी: मिनपा की झोपड़ी से राष्ट्रीय सम्मान तक का सफ Aajtak24 News

सुकमा; जहां कभी डर की दस्तक थी, वहां अब इलाज की रोशनी: मिनपा की झोपड़ी से राष्ट्रीय सम्मान तक का सफ Aajtak24 News

सुकमा - कभी नक्सलवाद, दुर्गम रास्तों और सरकारी सुविधाओं की कमी से पहचाने जाने वाले सुकमा जिले के मिनपा क्षेत्र ने अब एक नई पहचान गढ़ी है। यह कहानी सिर्फ एक स्वास्थ्य केंद्र की नहीं, बल्कि उस बदलाव की है जिसमें विकास ने भय पर जीत दर्ज करने की कोशिश की है। जिस क्षेत्र में कभी स्वास्थ्य सेवाएं एक झोपड़ी से संचालित होती थीं, वहां आज आधुनिक सुविधाओं से लैस उप स्वास्थ्य केंद्र खड़ा है। इस बदलाव के पीछे वर्षों की लगातार मेहनत, जोखिम और उन स्वास्थ्यकर्मियों की प्रतिबद्धता रही जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी गांवों का साथ नहीं छोड़ा।

झोपड़ी से शुरू हुई थी स्वास्थ्य सेवा की यात्रा

मिनपा क्षेत्र में शुरुआत ऐसे समय हुई जब इलाके तक पहुंचना ही बड़ी चुनौती माना जाता था। स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने सीमित संसाधनों के बीच ग्रामीणों तक पहुंच बनानी शुरू की। गांवों में कैंप लगाए गए, लोगों का इलाज हुआ और स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर भरोसा धीरे-धीरे मजबूत हुआ। साल 2024 में इस प्रयास को नई दिशा मिली जब मिनपा में नया उप स्वास्थ्य केंद्र भवन तैयार हुआ। इसके बाद यहां आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं, प्रयोगशाला व्यवस्था और नियमित स्टाफ की तैनाती की गई।

35 सौ से ज्यादा ग्रामीणों की उम्मीद बना केंद्र

आज यह उप स्वास्थ्य केंद्र मिनपा के साथ दुलेड़, एलमागुंडा, भाटपाड़, पोट्टेमडगू, टोंडामरका और गुंडराजपाड़ जैसे दूरस्थ गांवों की लगभग 3,593 आबादी को स्वास्थ्य सेवाएं दे रहा है। स्वास्थ्य सेवाओं का दायरा केवल केंद्र तक सीमित नहीं है। यहां की सबसे अलग तस्वीर उन टीमों की है जो मरीजों के पास खुद पहुंचती हैं।

रात के कैंप… और सेवा का अलग मॉडल

कई गांव ऐसे हैं जहां एक दिन में पहुंचकर लौटना संभव नहीं होता। ऐसे में स्वास्थ्यकर्मी वहीं रुकते हैं और ‘नाईट कैंप’ लगाकर जांच, उपचार और स्वास्थ्य सेवाएं जारी रखते हैं। इसी सतत प्रयास का असर है कि केंद्र में प्रतिदिन 15 से 20 मरीजों की ओपीडी दर्ज हो रही है और हर महीने औसतन चार सुरक्षित संस्थागत प्रसव कराए जा रहे हैं।

राष्ट्रीय गुणवत्ता मानक तक पहुंचा सफर

15 मई को इस केंद्र ने राष्ट्रीय गुणवत्ता मानक स्तर (NQAS) कार्यक्रम सफलतापूर्वक पूरा किया। यह उपलब्धि केवल भवन निर्माण की नहीं बल्कि स्वास्थ्यकर्मियों, मितानिनों, एएनएम, सीएचओ, सुपरवाइजर और जिला प्रशासन के संयुक्त प्रयासों का परिणाम मानी जा रही है। मिनपा की यह कहानी बताती है कि विकास केवल इमारतें नहीं बनाता— वह भरोसा भी बनाता है।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

1. राष्ट्रीय गुणवत्ता मानक मिलने के बाद क्या केंद्र में विशेषज्ञ डॉक्टर, दवा उपलब्धता और आपातकालीन सेवाओं का भी स्थायी विस्तार किया जाएगा?

2. जिन गांवों तक पहुंचने के लिए आज भी स्वास्थ्यकर्मियों को नाईट कैंप लगाने पड़ रहे हैं, वहां सड़क और स्थायी स्वास्थ्य पहुंच व्यवस्था कब तक विकसित होगी?

3. केंद्र की ओपीडी और संस्थागत प्रसव के आंकड़ों के आधार पर क्या स्वतंत्र मूल्यांकन हुआ है कि क्षेत्र में मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में वास्तविक सुधार कितना आया है?

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