मुरैना; सीमा पर जवान, अब जिम्मेदारी प्रशासन की… मुरैना में सैनिकों के लिए बना अलग हेल्पलाइन सिस्टम Aajtak24 News

मुरैना; सीमा पर जवान, अब जिम्मेदारी प्रशासन की… मुरैना में सैनिकों के लिए बना अलग हेल्पलाइन सिस्टम Aajtak24 News

मुरैना - सैनिकों और पूर्व सैनिकों के हितों को लेकर मुरैना प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित जिला सैनिक कल्याण बोर्ड की बैठक में कई अहम निर्णय लिए गए, जिनका सीधा लाभ सैनिकों, पूर्व सैनिकों और उनके परिजनों को मिलेगा। बैठक की अध्यक्षता कलेक्टर लोकेश कुमार जांगिड़ ने की। बैठक में सैनिकों से जुड़े मामलों के त्वरित और प्राथमिकता आधारित निराकरण पर विशेष जोर दिया गया। कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सैनिकों और उनके परिवारों से जुड़े विवादों का संवेदनशीलता और गंभीरता के साथ शीघ्र समाधान सुनिश्चित किया जाए।

बैठक का सबसे महत्वपूर्ण निर्णय जिला हेल्पलाइन में “सैनिक” नाम से अलग श्रेणी जोड़ने का रहा। प्रशासन का मानना है कि इससे सैनिकों और उनके परिजनों को त्वरित सहायता और शिकायतों के निराकरण में सुविधा मिलेगी। इसके अलावा जिले के सभी शहीद पार्कों के रखरखाव के लिए तहसील स्तर पर नोडल अधिकारियों की नियुक्ति का निर्णय भी लिया गया। सैनिकों के आधार सत्यापन की प्रक्रिया को सरल और सुगम बनाने पर भी चर्चा हुई। प्रशासन का कहना है कि कई पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों को दस्तावेजी प्रक्रियाओं में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, जिसे अब आसान बनाने की दिशा में काम किया जाएगा।

बैठक के दौरान कलेक्टर लोकेश कुमार जांगिड़ ने करीब डेढ़ घंटे तक पूर्व सैनिकों की समस्याएं सुनीं और संबंधित अधिकारियों को मौके पर ही आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सीमा पर तैनात सैनिकों को यह भरोसा होना चाहिए कि उनके परिवारों की समस्याओं के समाधान के लिए प्रशासन पूरी तरह संवेदनशील और तत्पर है। बैठक में पुलिस अधीक्षक धर्मराज मीणा, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुरेन्द्र पाल सिंह डाबर, भर्ती कार्यालय ग्वालियर के प्रतिनिधि इलियास, जिला सैनिक कल्याण अधिकारी एम.आर. पांडे, वरिष्ठ पूर्व सैनिक दीवान सिंह चौहान सहित अन्य अधिकारी और पूर्व सैनिक मौजूद रहे। बैठक के अंत में पूर्व सैनिकों ने प्रशासन के इस प्रयास की सराहना करते हुए इसे अब तक की सबसे सार्थक बैठक बताया।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. जिला हेल्पलाइन में “सैनिक” श्रेणी जोड़ने की घोषणा तो हो गई, लेकिन क्या शिकायतों के निराकरण की समयसीमा और जवाबदेही भी तय की गई है?
  2. पूर्व सैनिकों की समस्याएं वर्षों से लंबित रहने की शिकायतें आती रही हैं, तो क्या प्रशासन पुराने लंबित मामलों की समीक्षा कर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई करेगा?
  3. शहीद पार्कों के रखरखाव के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त करने का निर्णय लिया गया है, लेकिन क्या इसके लिए अलग बजट और मॉनिटरिंग व्यवस्था भी बनाई जाएगी या यह सिर्फ कागजी आदेश बनकर रह जाएगा?

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