सीधी; कुपोषण और मातृ स्वास्थ्य पर रीवा संभाग का बड़ा ‘ग्राउंड एक्शन’ Aajtak24 News

सीधी; कुपोषण और मातृ स्वास्थ्य पर रीवा संभाग का बड़ा ‘ग्राउंड एक्शन’ Aajtak24 News

सीधी - मातृ-शिशु स्वास्थ्य, कुपोषण उन्मूलन और टीकाकरण योजनाओं की वास्तविक स्थिति जानने के लिए रीवा संभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने सीधी जिले में संयुक्त मैदानी निरीक्षण किया। स्वास्थ्य और महिला-बाल विकास विभाग की इस संयुक्त पहल के तहत हेल्थ सेंटरों और आंगनबाड़ी गतिविधियों की जमीनी समीक्षा की गई, वहीं जिला पंचायत सभागार में समन्वय बैठक आयोजित कर अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए। बैठक में एस.बी. अवधिया, शशि श्याम उइके, ज्ञानेश मिश्रा तथा संभागीय समन्वयक अभय पाण्डेय सहित जिला एवं विकासखंड स्तर के अधिकारी मौजूद रहे।

वरिष्ठ अधिकारियों ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चुरहट, हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर चदैनिया और कपुरी का संयुक्त निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान दवा वितरण व्यवस्था, गर्भवती महिलाओं की एएनसी जांच, बच्चों के टीकाकरण, पोषण पुनर्वास केंद्रों की स्थिति, आंगनबाड़ी गतिविधियों और रिकॉर्ड संधारण की बारीकी से जांच की गई। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने कई स्थानों पर योजनाओं के क्रियान्वयन में कमियां भी चिन्हित कीं। इसके बाद समीक्षा बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए गए कि स्वास्थ्य एवं महिला-बाल विकास विभाग बेहतर समन्वय के साथ काम करें और योजनाओं के लक्ष्यों को शत-प्रतिशत पूरा करें।

क्षेत्रीय संचालक एस.बी. अवधिया ने हाई रिस्क गर्भवतियों की नियमित ट्रैकिंग, गंभीर कुपोषित बच्चों को एनआरसी रेफरल और समयबद्ध फॉलोअप सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए और इसमें किसी प्रकार की ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी।

संयुक्त संचालक शशि श्याम उइके ने निर्देश दिए कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और आशा कार्यकर्ता टीम भावना के साथ कार्य करें। बच्चों का नियमित वजन, समय पर टीकाकरण और गर्भवती महिलाओं का पंजीयन सुनिश्चित किया जाए। साथ ही दोनों विभागों के आंकड़ों में एकरूपता बनाए रखने पर भी जोर दिया गया। समीक्षा के दौरान पाई गई कमियों को दूर करने के लिए संबंधित अधिकारियों को 15 दिनों के भीतर गैप पूर्ति कर प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. यदि योजनाओं की जमीनी हकीकत जानने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों को खुद मैदानी निरीक्षण करना पड़ रहा है, तो क्या इसका मतलब यह नहीं कि स्थानीय स्तर की मॉनिटरिंग व्यवस्था प्रभावी नहीं है?
  2. कुपोषण और मातृ-शिशु स्वास्थ्य योजनाओं पर करोड़ों खर्च होने के बावजूद कई क्षेत्रों में गंभीर कुपोषित बच्चे मिल रहे हैं, तो आखिर जिम्मेदारी किसकी तय होगी?
  3. दोनों विभागों के आंकड़ों में एकरूपता बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं, तो क्या अब तक सरकार के पास मौजूद आंकड़ों में वास्तविक अंतर और त्रुटियां थीं?

Post a Comment

Previous Post Next Post