सुकमा; 7 दिन का अल्टीमेटम: मनरेगा और पीएम आवास पर जिला सीईओ की सख्ती Aajtak24 News

सुकमा; 7 दिन का अल्टीमेटम: मनरेगा और पीएम आवास पर जिला सीईओ की सख्ती Aajtak24 News

सुकमा -  विकास कार्यों की धीमी रफ्तार और लंबित योजनाओं पर प्रशासन अब सख्त रुख अपनाता नजर आ रहा है। जिला पंचायत सभाकक्ष में आयोजित समीक्षा बैठक में मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) श्री मुकुन्द ठाकुर ने मनरेगा और प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के कार्यों की विभागवार समीक्षा करते हुए अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि योजनाएं सिर्फ कागजों पर नहीं, जमीन पर दिखनी चाहिए। बैठक में मनरेगा के तहत रोजगार सृजन की स्थिति, लंबित कार्यों और तकनीकी प्रक्रियाओं की समीक्षा की गई। सीईओ ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि तय लक्ष्य के अनुरूप मानव दिवस सृजित किए जाएं और मजदूरों के लंबित ई-केवाईसी कार्य तत्काल पूरे किए जाएं, ताकि भुगतान और लाभ वितरण में देरी न हो।

इसके साथ ही उन्होंने मनरेगा के अंतर्गत स्वीकृत सभी कार्यों की जियो-टैगिंग अनिवार्य रूप से पूरी करने को कहा। प्रशासन का मानना है कि इससे कार्यों की वास्तविक स्थिति की निगरानी और पारदर्शिता बढ़ेगी। बैठक में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) की भी विस्तार से समीक्षा की गई। सीईओ ने निर्देश दिए कि हितग्राहियों को अधिकतम लाभ पहुंचाने के लिए 90 मानव दिवस उपलब्ध कराए जाएं, जिससे निर्माण कार्य समय पर पूरे हो सकें।

उन्होंने अंतिम चरण में पहुंच चुके आवासों को जल्द पूर्ण कर क्लोजर रिपोर्ट अपलोड करने के निर्देश दिए। साथ ही डबरी, तालाब और अन्य मिट्टी आधारित कार्यों को मानसून से पहले प्राथमिकता से पूरा करने को कहा गया। सबसे कड़ा संदेश लंबे समय से अधूरे पड़े कार्यों को लेकर दिया गया। सीईओ ने अधिकारियों से कहा कि ऐसे मामलों की तकनीकी और व्यावहारिक समीक्षा की जाए और यदि कार्य पूरे नहीं हो सकते तो नियमानुसार निरस्तीकरण या वसूली की कार्रवाई की जाए। बैठक के अंत में जिला सीईओ ने सभी संबंधित अधिकारियों को 07 दिन के भीतर अनुपालन प्रतिवेदन प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। प्रशासनिक संकेत साफ हैं—अब योजनाओं की समीक्षा केवल बैठकों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि तय समयसीमा में परिणाम भी मांगे जाएंगे।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

1. जिले में मनरेगा और पीएम आवास के कितने ऐसे कार्य हैं जो निर्धारित समयसीमा पार कर चुके हैं, और अब तक कितने अधिकारियों की जवाबदेही तय हुई है?

2. जियो-टैगिंग और ई-केवाईसी में देरी के पीछे तकनीकी समस्या ज्यादा है या विभागीय लापरवाही? इसकी स्वतंत्र समीक्षा कब होगी?

3. 7 दिन में मांगी गई अनुपालन रिपोर्ट के बाद क्या रिपोर्ट सार्वजनिक की जाएगी, ताकि ग्रामीण भी जान सकें कि उनके गांव में कौन-सा काम पूरा हुआ और कौन अभी लंबित है?

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