सिंगरौली; बारिश से पहले ‘गेहूं बचाओ मिशन’… सिंगरौली पहुंचे कमिश्नर, 48 घंटे में 90% उठाव का अल्टीमेटम” Aajtak24 News

सिंगरौली; बारिश से पहले ‘गेहूं बचाओ मिशन’… सिंगरौली पहुंचे कमिश्नर, 48 घंटे में 90% उठाव का अल्टीमेटम” Aajtak24 News

सिंगरौली - मौसम के बदलते मिजाज और बारिश की आशंका के बीच रीवा संभाग प्रशासन ने गेहूं उपार्जन केंद्रों पर सख्ती बढ़ा दी है। रीवा संभाग के कमिश्नर बी.एस. जामोद ने शुक्रवार को खुटार गेहूं उपार्जन केंद्र का आकस्मिक निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया और अधिकारियों को 48 घंटे के भीतर 90 प्रतिशत गेहूं उठाव सुनिश्चित करने का सख्त निर्देश दिया। निरीक्षण के दौरान कमिश्नर ने केंद्र पर बड़ी मात्रा में रखे गेहूं और धीमी उठाव प्रक्रिया पर नाराजगी जताई। उन्होंने अधिकारियों और परिवहनकर्ताओं से कहा कि यदि समय पर उठाव नहीं हुआ तो किसानों को परेशानी और अनाज को नुकसान दोनों का खतरा बढ़ जाएगा।

कमिश्नर बी.एस. जामोद ने स्पष्ट कहा कि बारिश की संभावना को देखते हुए उपार्जित गेहूं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने तिरपाल की पर्याप्त व्यवस्था रखने और जल निकासी के उचित इंतजाम करने के निर्देश दिए, ताकि बारिश या नमी के कारण किसानों की उपज खराब न हो। किसानों को तौल के लिए लंबा इंतजार न करना पड़े, इसके लिए केंद्र पर तत्काल प्रभाव से 6 तौल मशीनें पूरी क्षमता के साथ संचालित करने के निर्देश दिए गए। कमिश्नर ने कहा कि मशीनों की संख्या बढ़ाने से पारदर्शिता और कार्य की गति दोनों में सुधार होगा।

निरीक्षण के दौरान कलेक्टर गौरव बैनल, सीईओ जिला पंचायत जगदीश गोमे, सहायक कलेक्टर सौम्या मिश्रा, उपायुक्त सहकारिता पी.के. मिश्रा तथा जिला आपूर्ति अधिकारी पी.सी. चंद्रवंशी मौजूद रहे। कमिश्नर ने अधिकारियों को नियमित मॉनिटरिंग करने के निर्देश देते हुए चेतावनी दी कि यदि परिवहन में लापरवाही या मौसम के कारण गेहूं की गुणवत्ता प्रभावित हुई, तो संबंधित अधिकारियों और एजेंसियों पर कड़ी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

  1. यदि 48 घंटे में 90 प्रतिशत उठाव का लक्ष्य अभी तय करना पड़ रहा है, तो क्या इसका मतलब यह नहीं कि पहले से परिवहन और भंडारण की तैयारी पर्याप्त नहीं थी?
  2. हर साल बारिश से गेहूं खराब होने की शिकायतें सामने आती हैं, तो क्या इस बार नुकसान होने पर संबंधित अधिकारियों और परिवहन एजेंसियों की जवाबदेही तय की जाएगी?
  3. किसानों को तौल के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है, तो क्या प्रशासन यह सार्वजनिक करेगा कि अब तक केंद्र पर औसतन कितनी देरी से तौल कार्य हो रहा था?

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