दुर्ग; जनदर्शन में फूटा जनता का गुस्सा: कहीं तालाब बना कचरा घर, कहीं 3 साल से अटका मुआवजा Aajtak24 News

दुर्ग; जनदर्शन में फूटा जनता का गुस्सा: कहीं तालाब बना कचरा घर, कहीं 3 साल से अटका मुआवजा Aajtak24 News

दुर्ग - जिला कार्यालय में आयोजित जनदर्शन इस बार केवल शिकायतों का मंच नहीं रहा, बल्कि आम लोगों की नाराजगी और बुनियादी समस्याओं का आईना बनकर सामने आया। कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह ने जनसामान्य से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं और संबंधित विभागों को त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए। जनदर्शन में कुल 155 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें अवैध कब्जा, आवासीय पट्टा, प्रधानमंत्री आवास, सीमांकन, सड़क निर्माण, आर्थिक सहायता और मुआवजा जैसे मामले प्रमुख रहे।

सबसे ज्यादा चिंता उस शिकायत ने खींची, जिसमें राजमहल ग्रीन टाउन और सुंदर बिहार कॉलोनी के निवासियों ने तालाब के पास कचरा डंपिंग और रात में कचरा जलाने का मुद्दा उठाया। रहवासियों ने बताया कि तालाब किनारे जमा कचरा बारिश और हवा के साथ पानी में मिल रहा है, जिससे पानी हरा और बदबूदार हो गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इससे भूजल प्रदूषण का खतरा बढ़ गया है और बच्चों व बुजुर्गों में त्वचा रोग, आंखों में जलन, सांस और पेट संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं। नगर निगम ने बताया कि समस्या के समाधान के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, जिस पर कलेक्टर ने शीघ्र कार्रवाई के निर्देश दिए।

जनदर्शन में एक और मामला प्रशासनिक प्रक्रिया पर सवाल खड़ा करता दिखा। बोरसी निवासी आवेदिका ने बताया कि सड़क निर्माण के लिए उनकी भूमि का अधिग्रहण हुआ था और 2 लाख 45 हजार 480 रुपए मुआवजा तय होने के बावजूद तीन साल बाद भी राशि नहीं मिली। इस पर कलेक्टर ने लोक निर्माण विभाग को मामले का परीक्षण कर नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

इसी बीच बिरोदा क्षेत्र के ग्रामीणों ने एक निजी कंपनी द्वारा शिवनाथ नदी से पाइप लाइन बिछाने के लिए की जा रही खुदाई पर आपत्ति दर्ज कराई। ग्रामीणों का कहना है कि नदी से अत्यधिक जल उपयोग और खुदाई गतिविधियां आसपास के करीब 20 गांवों के जलस्तर को प्रभावित कर सकती हैं और भविष्य में पेयजल एवं सिंचाई संकट खड़ा हो सकता है। मामले को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर ने जल संसाधन विभाग को जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। जनदर्शन के दौरान प्रशासन का संदेश स्पष्ट रहा कि शिकायतों को केवल दर्ज नहीं किया जाएगा, बल्कि उनके समाधान की दिशा में विभागीय जवाबदेही भी तय होगी।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

1. यदि तालाब के पास लंबे समय से कचरा डंपिंग और जलाने की शिकायतें थीं, तो नगर निगम ने टेंडर होने तक प्रदूषण रोकने के लिए अंतरिम व्यवस्था क्यों नहीं की?

2. सड़क निर्माण के लिए अधिग्रहित भूमि का मुआवजा तीन साल तक लंबित रहने के लिए किस विभागीय अधिकारी की जवाबदेही तय की गई है?

3. निजी कंपनी को शिवनाथ नदी क्षेत्र में पाइप लाइन खुदाई की अनुमति किन पर्यावरणीय और जल उपलब्धता मानकों के आधार पर दी गई, और क्या स्थानीय ग्राम सभाओं की सहमति ली गई थी?

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