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| MPRDC की लापरवाही ने नेशनल हाईवे को बनाया 'डेथ ट्रैप', मृत गाय से टकराकर दो युवक गंभीर घायल Aajtak24 News |
रीवा - मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम (MPRDC) की कार्यप्रणाली और नेशनल हाईवे-30 के प्रबंधन पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बुधवार शाम, गढ़ थाना क्षेत्र के धाराविभा के पास एक भीषण सड़क हादसे ने दो परिवारों की खुशियों में अंधेरा भर दिया। सड़क के बीचों-बीच पड़ी एक मृत गाय से टकराकर मोटरसाइकिल सवार दो युवक गंभीर रूप से घायल हो गए, जिनमें से एक की हालत अत्यंत चिंताजनक बनी हुई है।
अंधेरे में काल बनी मृत गाय घटना बुधवार शाम लगभग 7:30 बजे की है। मोटरसाइकिल (क्रमांक MP 17 MU 9538) पर सवार पवन साकेत (निवासी शुकुली, नईगढ़ी) और रितेश साकेत (निवासी परासी) एनएच-30 से गुजर रहे थे। धाराविभा के पास सड़क के बीचों-बीच एक मृत गाय पड़ी हुई थी। शाम का धुंधलका और सड़क पर पर्याप्त रोशनी न होने के कारण बाइक चालक को मृत गाय दिखाई नहीं दी और तेज रफ्तार मोटरसाइकिल उससे टकरा गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि दोनों युवक सड़क पर कई फीट दूर जाकर गिरे।
MPRDC के दावों की खुली पोल स्थानीय प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, उक्त मृत गाय बुधवार सुबह से ही सड़क के बीचों-बीच पड़ी हुई थी। MPRDC, जो 24 घंटे पेट्रोलिंग और सुगम यातायात का दावा करता है, उसके कर्मचारी पूरे दिन वहां से गुजरते रहे, लेकिन किसी ने भी मृत गोवंश को हटाने की जहमत नहीं उठाई। ग्रामीणों का आरोप है कि इस लापरवाही के कारण उसी स्थान पर दिन भर में कुल तीन छोटी-बड़ी दुर्घटनाएं हुईं, लेकिन विभाग कुंभकर्णी नींद सोता रहा। यदि समय रहते शव को हटा लिया जाता, तो यह हादसा टाला जा सकता था।
पुलिस ने दिखाई तत्परता, डॉक्टरों ने किया रेफर हादसे की जानकारी मिलते ही गढ़ थाना पुलिस तत्काल मौके पर पहुँची। पुलिस ने मानवता का परिचय देते हुए बिना समय गंवाए डायल 112 की मदद से घायलों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गंगेव पहुँचाया। प्राथमिक उपचार के बाद, पवन साकेत की नाजुक हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें बेहतर इलाज के लिए रीवा के संजय गांधी मेमोरियल अस्पताल (SGMH) रेफर कर दिया है। बाद में पुलिस ने निजी जेसीबी बुलाकर मृत गाय को सड़क से हटवाया ताकि भविष्य में कोई और अप्रिय घटना न हो।
जनता का आक्रोश: क्या होगी कार्रवाई? इस घटना के बाद गंगेव और गढ़ क्षेत्र के निवासियों में एमपीआरडीसी के खिलाफ भारी आक्रोश व्याप्त है। ग्रामीणों का सवाल है कि टोल टैक्स की वसूली के नाम पर सक्रिय रहने वाला विभाग सुरक्षा और सफाई के मामले में इतना लापरवाह क्यों है? क्या इस गंभीर लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और पेट्रोलिंग टीम पर कोई दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी या फिर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?
