| जल गंगा संवर्धन अभियान: किसानों की समृद्धि का आधार बनेगा जल संरक्षण, ग्राम घोपी में गोष्ठी आयोजित Aajtak24 News |
रीवा -कलेक्टर महोदया एवं उपसंचालक कृषि रीवा के निर्देशानुसार, 'किसान कल्याण वर्ष 2026' के तहत गंगेव विकासखंड के ग्राम घोपी में "जल गंगा संवर्धन अभियान" के अंतर्गत एक विशेष जल संवर्धन गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य गिरते भूजल स्तर को सुधारना और किसानों को जल आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर करना रहा।
तकनीकी खेती और 'हर बूंद की रक्षा' पर जोर
कार्यक्रम में आत्मा परियोजना के बीटीएम दीपक कुमार श्रीवास्तव ने अभियान के महत्व पर प्रकाश डालते हुए इसे "हर बूंद की रक्षा" और नदियों व जलस्रोतों के पुनर्जीवन के लिए एक महत्वपूर्ण जन-अभियान बताया। उन्होंने कहा कि बदलते जलवायु परिवेश में भूजल पुनर्भरण ही भविष्य की खेती का आधार है। तकनीकी प्रबंधकों द्वारा कृषकों को कम पानी में अधिक उत्पादन प्राप्त करने के लिए आधुनिक सिंचाई पद्धतियों की जानकारी दी गई, जिसमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
ड्रिप एवं स्प्रिंकलर सिंचाई: पानी की बर्बादी रोकने के लिए सूक्ष्म सिंचाई।
मल्चिंग तकनीक: मिट्टी की नमी बरकरार रखने हेतु।
वर्षा जल संचयन: बारिश के पानी को सहेजकर खेती में उपयोग करना।
प्राकृतिक खेती से बढ़ेगी जल धारण क्षमता
गोष्ठी में उपस्थित किसानों को फसल चक्र अपनाने और जैविक खेती के लाभ बताए गए। विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि मृदा स्वास्थ्य में सुधार और जैविक पदार्थों के उपयोग से मिट्टी की जल धारण क्षमता बढ़ती है, जिससे बार-बार सिंचाई की आवश्यकता कम हो जाती है। कृषि विभाग ने अपील की कि जल संरक्षण से न केवल खेती की लागत घटेगी, बल्कि आने वाली पीढ़ियां भी सुरक्षित रहेंगी।
शासकीय योजनाओं और अनुदान पर चर्चा
वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी श्री शिवशरण सरल ने कृषकों को विभाग की हितग्राही मूलक योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बलराम तालाब योजना, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत स्प्रिंकलर व ड्रिप सिंचाई पर मिलने वाले अनुदान (Subsidy) की प्रक्रिया समझाई। साथ ही, नरवाई प्रबंधन, उद्यानिकी और पशुपालन विभाग की योजनाओं पर भी विस्तार से चर्चा की गई।
उपस्थिति: इस अवसर पर ग्राम घोपी के सरपंच समरजीत पटेल, आशीष पटेल सहित मढ़ीखुर्द, पचपहरा, सेंधहा एवं अन्य ग्रामों के प्रगतिशील कृषक मौजूद रहे। कार्यक्रम में कृषि विस्तार अधिकारी, दीपिका तिवारी (तकनीकी प्रबंधक) एवं आत्मा परियोजना का स्टाफ उपस्थित रहा। कार्यक्रम का समापन “जल है तो कल है” के संकल्प के साथ किया गया।