तराई में 'जंगलराज': पूर्व सरपंच पर तलवार और फरसे से खूनी हमला, पुलिस की सुस्ती से अपराधियों के हौसले बुलंद Aajtak24 News

तराई में 'जंगलराज': पूर्व सरपंच पर तलवार और फरसे से खूनी हमला, पुलिस की सुस्ती से अपराधियों के हौसले बुलंद Aajtak24 News

रीवा - जिले का तराई क्षेत्र इन दिनों अपराधियों की चरागाह बनता जा रहा है। सिरमौर विधानसभा के पनवार थाना अंतर्गत ग्राम पंचायत ऊपरवार के पूर्व सरपंच राजपाल यादव पर हुए जानलेवा हमले ने पुलिस प्रशासन की मुस्तैदी की पोल खोलकर रख दी है। 10 से 11 नकाबपोश अपराधियों ने मुख्य सड़क पर घेराबंदी कर जिस तरह से खूनी खेल खेला, उसने समूचे इलाके में दहशत फैला दी है।

शाम ढलते ही मौत का तांडव

घटना 31 मार्च की शाम 5 से 6 बजे के बीच की है। पूर्व सरपंच राजपाल यादव अपने दो साथियों के साथ जा रहे थे, तभी घात लगाकर बैठे नकाबपोशों ने लोहे की रॉड, तलवार, लाठी और फरसे से उन पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया। हमलावर उन्हें मरा हुआ समझकर मौके से फरार हो गए। हमले में तीनों को गंभीर चोटें आई हैं, लेकिन पूर्व सरपंच की हालत नाजुक होने के कारण उन्हें पहले संजय गांधी अस्पताल रीवा और फिर वहां से उत्तर प्रदेश (UP) के लिए रेफर कर दिया गया है। फिलहाल उनकी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

खाकी पर दाग: FIR के लिए भटक रहे परिजन

हैरानी की बात यह है कि घटना के 24 घंटे बीत जाने के बाद भी पनवार पुलिस का रवैया टालमटोल वाला रहा। वरिष्ठ सपा नेता जगदीश सिंह यादव ने आरोप लगाया है कि पुलिस अपराधियों को बचाने का प्रयास कर रही है। परिजनों द्वारा नामजद बयान देने के बावजूद 1 अप्रैल की शाम तक न तो एफआईआर दर्ज की गई और न ही रिपोर्ट की कॉपी दी गई। नेताजी ने चेतावनी दी है कि यदि दोषियों को तत्काल गिरफ्तार नहीं किया गया, तो 3 अप्रैल को थाने के सामने उग्र धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।

दहशत में तराई: 'जब जनप्रतिनिधि सुरक्षित नहीं, तो आमजन का क्या?'

तराई के डभौरा, पनवार और अतरैला थाना क्षेत्रों में हाल के दिनों में हत्या और जानलेवा हमलों की बाढ़ आ गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस और सफेदपोशों के संरक्षण के कारण अपराधियों के मन से कानून का खौफ खत्म हो चुका है। हाल ही में रामबाग में अतीक अहमद की सरेराह हत्या ने भी पुलिस की निष्क्रियता को उजागर किया था। ग्रामीणों में डर है कि जो पूर्व सरपंच गरीबों और आदिवासियों की आवाज उठाता था, जब वही सुरक्षित नहीं है, तो आम नागरिक किसके भरोसे रहेगा?

लगातार हो रही ये वारदातें जिला पुलिस कप्तान की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़ा करती हैं। क्या रीवा पुलिस अब केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित रह गई है? तराई क्षेत्र की जनता अब ठोस कार्रवाई और न्याय की बाट जोह रही है।




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