रीवा में राशन वितरण का 'फिंगरप्रिंट' खेल: बुजुर्गों के अंगूठे लगवाए, पर डकार गए उनका निवाला Aajtak24 News

रीवा में राशन वितरण का 'फिंगरप्रिंट' खेल: बुजुर्गों के अंगूठे लगवाए, पर डकार गए उनका निवाला Aajtak24 News

रीवा - मध्य प्रदेश सरकार जहाँ एक ओर अंत्योदय और गरीब कल्याण की योजनाओं का ढिंढोरा पीट रही है, वहीं रीवा जिले के दूरदराज क्षेत्रों में जमीनी हकीकत इसके उलट है। जिले के बाबू पुर (लौरी) क्षेत्र में सरकारी उचित मूल्य की दुकान पर राशन वितरण में भारी धांधली का मामला प्रकाश में आया है। यहाँ के असहाय बुजुर्गों ने कोटेदार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि उनकी आंखों में धूल झोंककर उनके हक का निवाला छीना जा रहा है।

मशीन पर अंगूठा लगवाया, फिर कहा- 'गल्ला खत्म'

पीड़ित ग्रामीणों का कहना है कि कोटेदार गणेश द्वारा डिजिटल धांधली का सहारा लिया जा रहा है। 70 वर्षीय बुजुर्ग मोहम्मद मुस्तफा और नसीरुद्दीन ने आपबीती सुनाते हुए बताया कि कोटेदार ने उनसे ई-पॉश (e-POS) मशीन पर फिंगरप्रिंट (अंगूठे के निशान) तो लगवा लिए, जिससे सरकारी रिकॉर्ड में राशन का वितरण सफल दिख जाए। लेकिन जब अनाज देने की बारी आई, तो कोटेदार ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि "अभी गल्ला (अनाज) ऊपर से आया ही नहीं है।"

70 साल के बुजुर्ग का दर्द: "आखिर हम खाएंगे क्या?"

भावुक होते हुए मोहम्मद मुस्तफा ने कहा, "हम बुजुर्ग लोग हैं, चल-फिर नहीं पाते। कोटेदार बुलाता है, अंगूठा लगवा लेता है और फिर राशन देने से मना कर देता है। अगर हमें हमारा हक नहीं मिलेगा, तो इस उम्र में हम क्या खाएंगे?" ग्रामीणों के अनुसार, केवल मुस्तफा और नसीरुद्दीन ही नहीं, बल्कि गाँव के 5 से 7 अन्य बुजुर्ग और गरीब परिवार भी इसी तरह की धोखाधड़ी का शिकार हुए हैं।

अधिकारियों की चुप्पी और आश्वासन का खेल

हैरानी की बात यह है कि पीड़ितों ने इस संबंध में स्थानीय जनसेवकों और संबंधित विभागीय अधिकारियों से भी गुहार लगाई है। लेकिन कार्रवाई के नाम पर उन्हें केवल 'आश्वासन' और 'कागजों की फोटोकॉपी' करवाने के चक्करों में उलझा दिया गया। प्रशासन की यह उदासीनता भ्रष्ट कोटेदारों के हौसले बुलंद कर रही है।

प्रशासन से कड़ी कार्रवाई की मांग

बाबू पुर के ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और खाद्य विभाग के उच्च अधिकारियों से मांग की है कि:

  1. कोटेदार के स्टॉक और वितरण मशीन की तत्काल फोरेंसिक जांच की जाए।

  2. दोषी पाए जाने पर कोटेदार का लाइसेंस निरस्त कर एफआईआर दर्ज की जाए।

  3. पीड़ित बुजुर्गों को उनके हिस्से का बकाया राशन तुरंत उपलब्ध कराया जाए।

डिजिटल इंडिया के दौर में अगर फिंगरप्रिंट लगने के बाद भी गरीब को अनाज न मिले, तो यह व्यवस्था की बड़ी विफलता है। देखना यह होगा कि रीवा प्रशासन इन बुजुर्गों को न्याय दिला पाता है या कोटेदार की मनमानी यूं ही जारी रहेगी।



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