रीवा में चिकित्सा के नाम पर 'महाठगी': पत्नी के किडनी ट्रांसप्लांट का झांसा देकर हड़पे 56 लाख, आरोपी हरदा से गिरफ्तार Aajtak24 News

रीवा में चिकित्सा के नाम पर 'महाठगी': पत्नी के किडनी ट्रांसप्लांट का झांसा देकर हड़पे 56 लाख, आरोपी हरदा से गिरफ्तार Aajtak24 News

रीवा - रीवा शहर में धोखाधड़ी और जालसाजी का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने रिश्तों और भरोसे की धज्जियां उड़ा दी हैं। एक व्यक्ति की बीमार पत्नी के जीवन और मौत के संघर्ष का फायदा उठाते हुए एक शातिर ठग ने किडनी ट्रांसप्लांट के नाम पर 56 लाख रुपये की बड़ी रकम डकार ली। हालांकि, कानून के लंबे हाथों से आरोपी बच नहीं सका और रीवा की कोतवाली पुलिस ने उसे प्रदेश के हरदा जिले से दबोच लिया है।

भावनात्मक शोषण और ठगी की शुरुआत

घटना की नींव अगस्त 2025 में पड़ी, जब अशोक नगर तरहटी (वार्ड क्रमांक 31) निवासी दिलीप कुमार सोनी (40 वर्ष) की पत्नी की तबीयत अचानक बिगड़ गई। डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें तत्काल 'किडनी ट्रांसप्लांट' कराने की सलाह दी। एक तरफ पत्नी की गिरती सेहत और दूसरी तरफ भारी भरकम खर्च के बोझ तले दबे दिलीप की मुलाकात प्रियांशू पवार उर्फ आयुष पवार नाम के युवक से हुई। आरोपी प्रियांशू ने खुद को रसूखदार बताते हुए दिलीप को भरोसा दिलाया कि वह भोपाल के प्रतिष्ठित बंसल अस्पताल में उनकी पत्नी का सफल ट्रांसप्लांट करवा देगा। दुख की घड़ी में मदद का हाथ बढ़ता देख दिलीप ने उस पर आंख मूंदकर भरोसा कर लिया, जो बाद में उनके जीवन की सबसे बड़ी भूल साबित हुई।

किस्तों में वसूली गई 56 लाख की मोटी रकम

आरोपी ने अस्पताल के खर्च, डॉक्टर की फीस, किडनी डोनर के इंतजाम और कागजी औपचारिकताओं के नाम पर दिलीप सोनी से अलग-अलग समय पर पैसों की मांग शुरू की। अगस्त 2025 से लेकर मार्च 2026 के बीच, आरोपी ने विभिन्न बैंक खातों में ऑनलाइन माध्यम से कुल 56 लाख रुपये ट्रांसफर करवा लिए। दिलीप अपनी पत्नी की जान बचाने की आस में अपनी जमा-पूंजी और संसाधन आरोपी के हवाले करते रहे।

संदेह की सुई और पुलिस की एंट्री

जब महीनों बीत जाने के बाद भी ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई और आरोपी लगातार नए-नए बहाने बनाकर और पैसों की मांग करने लगा, तो दिलीप को दाल में कुछ काला नजर आया। उन्होंने जब अस्पताल और संबंधित सूत्रों से निजी तौर पर जांच की, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। उन्हें पता चला कि वह एक सुनियोजित ठगी का शिकार हो चुके हैं। हार मानकर दिलीप ने 20 मार्च 2026 को रीवा के सिटी कोतवाली थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक (SP) श्री शैलेन्द्र सिंह चौहान ने तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए।

हरदा में चला पुलिस का 'ऑपरेशन क्लीन'

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्रीमती आरती सिंह और सीएसपी श्री राजीव पाठक के मार्गदर्शन में थाना प्रभारी श्रृंगेश सिंह राजपूत के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई। पुलिस ने साइबर सेल की मदद से आरोपी के मोबाइल लोकेशन और बैंक ट्रांजैक्शन को ट्रेस किया, जिससे उसका सुराग जिला हरदा में मिला। पुलिस टीम ने बिना वक्त गंवाए हरदा में दबिश दी और आरोपी प्रियांशू पवार को गिरफ्तार कर रीवा ले आई।

रिमांड पर आरोपी: बड़े गिरोह के खुलासे की उम्मीद

पुलिस ने आरोपी को न्यायालय में पेश कर एक दिन की पुलिस रिमांड हासिल की है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि प्रारंभिक पूछताछ में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। आशंका जताई जा रही है कि प्रियांशू किसी बड़े 'मेडिकल ठग गिरोह' का हिस्सा हो सकता है, जो गंभीर बीमारियों से जूझ रहे परिवारों को अपना निशाना बनाता है। पुलिस अब उन बैंक खातों की जांच कर रही है जिनमें पैसे ट्रांसफर किए गए थे, ताकि ठगी की रकम बरामद की जा सके।

पुलिस की चेतावनी: सतर्क रहें आमजन

रीवा पुलिस ने इस घटना के माध्यम से आम नागरिकों से अपील की है कि:

  • गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए केवल अधिकृत अस्पतालों और डॉक्टरों के संपर्क में रहें।

  • किसी भी बिचौलिए या अनजान व्यक्ति को इलाज के नाम पर बड़ी नकद या ऑनलाइन रकम न दें।

  • अस्पताल की रसीद और औपचारिक दस्तावेजों की पुष्टि स्वयं जाकर करें।

दिलीप कुमार सोनी के साथ हुई यह ठगी समाज के लिए एक सबक है। जहां एक ओर पुलिस की सफलता सराहनीय है, वहीं इस मामले ने स्वास्थ्य सेवाओं में बिचौलियों के बढ़ते दखल पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।



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