संजय गांधी अस्पताल के ICU में आग से मचा हड़कंप; ऑक्सीजन सप्लाई ठप, मौत के साये में रहे मरीज Aajtak24 News

संजय गांधी अस्पताल के ICU में आग से मचा हड़कंप; ऑक्सीजन सप्लाई ठप, मौत के साये में रहे मरीज Aajtak24 News

रीवा - विंध्य क्षेत्र के सबसे बड़े चिकित्सा केंद्र, संभागीय संजय गांधी अस्पताल में शुक्रवार दोपहर एक बार फिर बड़ी लापरवाही सामने आई। मेडिसिन विभाग के तीसरे तल पर स्थित आईसीयू (ICU) में शॉर्ट सर्किट के कारण अचानक आग लग गई। दोपहर 12 से 1 बजे के बीच हुए इस हादसे ने न केवल अस्पताल प्रबंधन की पोल खोल दी, बल्कि भर्ती मरीजों की जान भी सांसत में डाल दी।

धुआं और फायर अलार्म: अफरा-तफरी का माहौल

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आईसीयू के मॉनिटर्स से अचानक धुआं निकलने लगा, जिसके तुरंत बाद फायर अलार्म बज उठा। वार्ड में धुआं भरते ही मरीजों और उनके परिजनों में चीख-पुकार मच गई। आनन-फानन में गंभीर मरीजों को वार्ड से बाहर निकाला गया। आग के कारण आईसीयू का मुख्य ऑक्सीजन सप्लाई सिस्टम पूरी तरह ठप हो गया, जो कि बेहद घातक साबित हो सकता था। मौके पर मौजूद स्टाफ और फायर सेफ्टी टीम ने तत्काल मोर्चा संभाला और वैकल्पिक ऑक्सीजन सिलेंडरों की व्यवस्था कर स्थिति को नियंत्रित किया।

प्रबंधन की संवेदनहीनता: मीडिया से मिली जानकारी!

हैरानी की बात यह है कि इस संवेदनशील घटना की जानकारी अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) को मीडिया के माध्यम से मिली। उन्होंने मौके पर पहुंचने के बाद ही स्थिति स्पष्ट करने की बात कही, जो प्रबंधन की ढुलमुल कार्यप्रणाली को दर्शाता है। इससे पहले भी अस्पताल के 'गायनिक ओटी' में आगजनी की घटना हो चुकी है, लेकिन दोषियों पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

मेडिकल हब या निजीकरण की साजिश?

यह घटना उस संभाग की है जहाँ से प्रदेश के उपमुख्यमंत्री आते हैं और जिनके पास स्वयं स्वास्थ्य मंत्रालय का जिम्मा है। रीवा को 'मेडिकल हब' बनाने के दावे तो किए जा रहे हैं, लेकिन सरकारी अस्पतालों में साल में दो-तीन बार होने वाली ऐसी घटनाएं मरीजों में भय पैदा कर रही हैं। सवाल उठ रहा है कि क्या ये हादसे जानबूझकर सरकारी व्यवस्था को कमजोर करने और मरीजों का रुझान निजी अस्पतालों (Private Hospitals) की ओर मोड़ने की कोई गहरी साजिश तो नहीं? लगातार हो रही इन घटनाओं ने अब बड़े प्रशासनिक हस्तक्षेप की मांग तेज कर दी है। देखना होगा कि इस बार जिम्मेदार अधिकारियों पर गाज गिरती है या फिर हमेशा की तरह मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।



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