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| मऊगंज का 'राजस्व लोक': जहाँ फाइलें 'लापता' होती हैं और न्याय की 'नीलामी' होती है! Aajtak24 News |
मऊगंज - जिले में सुलभ और त्वरित न्याय के सरकारी दावों की जमीनी हकीकत अब 'लोकायुक्त' की ताबड़तोड़ कार्यवाहियों से सरेआम हो रही है। राजस्व विभाग, जो सीधे तौर पर किसानों और ग्रामीणों की रीढ़ माना जाता है, आज भ्रष्टाचार के दलदल में इस कदर धंस चुका है कि यहाँ बिना 'चढ़ावे' के फाइल का एक पन्ना भी आगे नहीं सरकता। पटवारी से लेकर नायब तहसीलदार स्तर तक पनपे इस तंत्र ने आम जनता के विश्वास को पूरी तरह झकझोर दिया है।
सीमांकन बना 'उगाही' का औजार
जिले में लंबित हजारों राजस्व मुकदमों की अगर निष्पक्ष जांच हो, तो अधिकांश विवादों की जड़ में पटवारी और राजस्व निरीक्षक (RI) की संदिग्ध भूमिका उजागर होगी। सीमांकन और कब्जे की जांच के नाम पर जमीन की हेराफेरी और रसूखदारों को फायदा पहुँचाने का जो खेल चल रहा है, वही मुकदमों की बाढ़ का मुख्य कारण है। राजस्व न्यायालय अब न्याय की उम्मीद नहीं, बल्कि तारीखों और मानसिक प्रताड़ना का केंद्र बन गए हैं।
गायब फाइलें: सबूत मिटाने का नया तरीका?
तहसील और अनुभाग कार्यालयों से महत्वपूर्ण फाइलों का 'गायब' होना अब कोई इत्तेफाक नहीं, बल्कि एक सोची-समझी साजिश जान पड़ती है। आश्चर्य की बात यह है कि जिले के आला अधिकारियों ने कभी इन फाइलों का भौतिक सत्यापन करने की जहमत नहीं उठाई। जब न्याय की बुनियाद यानी 'दस्तावेज' ही सुरक्षित नहीं हैं, तो आम आदमी किसके भरोसे न्यायालय के चक्कर काटे? प्रशासनिक अमले की कमी का रोना रोकर इस अव्यवस्था को ढका जा रहा है।
रसूख की 'पोस्टिंग' और जनता की 'बलि'
प्रशासनिक गलियारों में यह कड़वा सच चर्चा का विषय है कि मऊगंज में किसी थानेदार या तहसीलदार की कुर्सी बिना 'राजनीतिक सिफारिश' के नहीं टिकती। जनप्रतिनिधियों की 'विशेष अपेक्षाओं' को पूरा करने के चक्कर में अधिकारी जनता के हितों की बलि चढ़ा रहे हैं। यही वजह है कि लोकायुक्त के शिकंजे के बावजूद भ्रष्टाचार की जड़ें कटने का नाम नहीं ले रही हैं।
प्रशासन और सरकार से कड़े सवाल:
गुमशुदा फाइलें: तहसील कार्यालयों से फाइलें चोरी होने या गुम होने पर जिम्मेदार बाबुओं और अधिकारियों पर FIR दर्ज क्यों नहीं होती?
भौतिक सत्यापन: क्या जिला प्रशासन कभी राजस्व न्यायालयों में लंबित प्रकरणों की फाइलों का औचक निरीक्षण करेगा?
राजनीतिक दखल: क्या प्रशासनिक शुचिता को बहाल करने के लिए तबादलों और पदस्थापना में राजनीतिक हस्तक्षेप बंद होगा?
आजतक 24 का प्रहार: अगर राजस्व विभाग की इस सड़ांध को साफ नहीं किया गया, तो मऊगंज का किसान केवल दफ्तरों की चौखट और लोकायुक्त की कार्यवाहियों के बीच पिसकर रह जाएगा।
