वर्दी के पीछे छिपे 'देवदूत': पांढुरना से लौट रहे रीवा के जांबाज नव-आरक्षकों ने बचाई दर्जनों की जान Aajtak24 News

वर्दी के पीछे छिपे 'देवदूत': पांढुरना से लौट रहे रीवा के जांबाज नव-आरक्षकों ने बचाई दर्जनों की जान Aajtak24 News

रीवा/छिंदवाड़ा - अक्सर खाकी वर्दी को सख्त अनुशासन और कानून व्यवस्था के चश्मे से देखा जाता है, लेकिन छिंदवाड़ा के पांढुरना में जो कुछ हुआ, उसने सिद्ध कर दिया कि पुलिस की वर्दी के भीतर एक अत्यंत संवेदनशील और साहसी हृदय धड़कता है। रीवा पुलिस लाइन के चार नव-आरक्षकों ने अपनी त्वरित सूझबूझ और निस्वार्थ सेवा भाव से भीषण बस दुर्घटना में न केवल दर्जनों लोगों को मौत के मुँह से बाहर निकाला, बल्कि मानवता की एक ऐसी मिसाल पेश की जिसे बरसों तक याद रखा जाएगा।

ड्यूटी से लौटते समय हुआ साक्षात 'यमराज' से सामना

घटना 26 मार्च, 2026 की है। रीवा पुलिस बल का एक दल मुख्यमंत्री (CM) सुरक्षा ड्यूटी के लिए पांढुरना (छिंदवाड़ा) गया हुआ था। शाम करीब 7 बजे, जब ये जवान अपनी ड्यूटी पूरी कर वापस रीवा लौट रहे थे, तभी रास्ते में एक ऐसा मंजर दिखा जिसने सबके रोंगटे खड़े कर दिए। एक यात्री बस अनियंत्रित होकर सड़क किनारे पलट चुकी थी। बस के भीतर से आ रही चीख-पुकार और खिड़कियों से बाहर निकलते खून से लथपथ हाथ यह बताने के लिए काफी थे कि हादसा कितना भयावह है।

आरक्षकों ने संभाला मोर्चा: बिना संसाधनों के किया रेस्क्यू

हादसे की भयावहता देख रीवा के नव-आरक्षकों ने एक पल भी नहीं गंवाया। अंधेरा गहरा रहा था और बस के मलबे में यात्री बुरी तरह दबे हुए थे। रोहित मालवीय, देवेन्द्र राठौर, अंकित पिपलोटिया और कमल गहलोत ने अपनी जान की परवाह किए बिना बस के भीतर प्रवेश किया। उन्होंने न केवल मलबे को हटाया बल्कि कांच के टुकड़ों और मुड़ी हुई लोहे की चादरों के बीच से बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को सुरक्षित बाहर निकाला। जवानों ने मौके पर मौजूद ग्रामीणों की मदद से घायलों को प्राथमिक उपचार दिया और तुरंत एम्बुलेंस के साथ-साथ निजी वाहनों की व्यवस्था कर उन्हें नजदीकी अस्पताल भिजवाया।

संवेदनशीलता की पराकाष्ठा: शवों का किया सम्मानजनक प्रबंधन

इस भीषण दुर्घटना में करीब 9 से 10 यात्रियों की दुखद मृत्यु हो गई थी। ऐसी विकट परिस्थिति में जहाँ आम लोग सहम जाते हैं, वहां इन नव-आरक्षकों ने धैर्य का परिचय दिया। उन्होंने पूरी संवेदनशीलता के साथ मृतकों के पार्थिव शरीरों को निकाला और उन्हें व्यवस्थित किया, ताकि उनकी पहचान और आगे की प्रक्रिया सम्मानपूर्वक पूरी की जा सके। जवानों का यह कार्य उनकी उच्च स्तर की ट्रेनिंग और मानवीय मूल्यों को दर्शाता है।

प्रशासन और जनता ने थपथपाई पीठ

जैसे ही इस रेस्क्यू ऑपरेशन की खबर जिला प्रशासन तक पहुँची, कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक (SP) स्वयं मौके पर पहुँचे। उन्होंने रीवा पुलिस के इन जांबाजों के साहस को देखकर उनकी जमकर प्रशंसा की। अधिकारियों ने कहा कि "रीवा पुलिस के इन जवानों ने साबित कर दिया है कि पुलिस का काम केवल अपराधियों को पकड़ना ही नहीं, बल्कि संकट के समय नागरिकों की सुरक्षा के लिए सबसे पहले खड़े होना भी है।" स्थानीय ग्रामीणों ने भी पुलिस बल के इस निस्वार्थ सेवा भाव की सराहना करते हुए उन्हें 'असली नायक' बताया।

नायक जो बने मिसाल

दुर्घटनास्थल पर अपनी जान जोखिम में डालकर लोगों की मदद करने वाले रीवा जिले के ये वो जांबाज हैं जिनका नाम आज हर जुबान पर है:

  1. रोहित मालवीय (रोल नंबर 394)

  2. देवेन्द्र राठौर (रोल नंबर 395)

  3. अंकित पिपलोटिया (रोल नंबर 405)

  4. कमल गहलोत (रोल नंबर 406)

रीवा पुलिस लाइन के ये नव-आरक्षक अब न केवल अपने विभाग के लिए गर्व का विषय हैं, बल्कि पूरे प्रदेश के युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुके हैं।



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