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| भ्रष्टाचार की 'टंकी' जमींदोज: मऊगंज में उद्घाटन से पहले ही ताश के पत्तों की तरह ढहा जल जीवन मिशन का ढांचा Aajtak24 News |
मऊगंज - मध्य प्रदेश के नवगठित जिले मऊगंज में सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच के अंतर को उजागर करने वाली एक खौफनाक तस्वीर सामने आई है। नईगढ़ी जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत खटखरी में 'जल जीवन मिशन' के तहत लाखों की लागत से बनकर तैयार हुई पानी की टंकी पहली टेस्टिंग भी नहीं झेल सकी और उद्घाटन से पहले ही धराशायी हो गई। यह हादसा भ्रष्टाचार की उस पराकाष्ठा को दर्शाता है, जहाँ जनता की गाढ़ी कमाई को घटिया निर्माण सामग्री की भेंट चढ़ा दिया गया। गनीमत रही कि यह घटना रात के समय हुई, अन्यथा किसी बड़ी जनहानि और मलबे में दबकर मासूम जिंदगियों के जाने से इनकार नहीं किया जा सकता था।
पहली बूंद गिरते ही ढह गया 'विकास' का किला
ग्रामीणों के अनुसार, टंकी का निर्माण कार्य हाल ही में पूरा हुआ था और इसे जल्द ही जनता को समर्पित किया जाना था। जैसे ही टेस्टिंग के लिए टंकी में पहली बार पानी भरा गया, पूरी संरचना पानी के दबाव को सहन नहीं कर पाई और भरभराकर गिर गई। मौके पर बिखरा हुआ कंक्रीट, रेत की अधिक मात्रा और बेहद पतला सरिया इस बात की चीख-चीखकर गवाही दे रहा है कि निर्माण में गुणवत्ता के मानकों को पूरी तरह ताक पर रखा गया था।
शिकायतों पर 'धृतराष्ट्र' बना रहा प्रशासन
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि जब टंकी का निर्माण चल रहा था, तब भी घटिया सामग्री के इस्तेमाल को लेकर कई बार मौखिक और लिखित शिकायतें की गई थीं। लेकिन पीएचई (PHE) विभाग के अधिकारियों और संबंधित इंजीनियरों ने भ्रष्टाचार की पट्टी बांधकर इन शिकायतों को अनसुना कर दिया। ग्रामीणों का कहना है कि ठेकेदार और विभाग की मिलीभगत के कारण ही आज खटखरी पंचायत में यह 'मौत का ढांचा' खड़ा किया गया था।
प्रशासन के सामने खड़े 5 बड़े और चुभते सवाल:
इंजीनियरों की चुप्पी: निर्माण के दौरान क्या पीएचई विभाग के अधिकारियों ने मौके पर जाकर गुणवत्ता की जांच की थी? यदि हाँ, तो उन्होंने इस लचर निर्माण को हरी झंडी कैसे दी?
भ्रष्टाचार का खुला खेल: मलबे की हालत देख स्पष्ट है कि सीमेंट और लोहे में भारी कटौती की गई। क्या ठेकेदार को घटिया निर्माण की मूक सहमति दी गई थी?
अनदेखी का जिम्मेदार कौन: ग्रामीणों की शिकायतों पर समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या प्रशासन किसी की जान जाने का इंतजार कर रहा था?
रिकवरी और दंड: क्या दोषी ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट किया जाएगा और उससे सरकारी धन की शत-प्रतिशत वसूली होगी?
अन्य टंकियों का सुरक्षा ऑडिट: जिले में जल जीवन मिशन के तहत बनी अन्य टंकियों की सुरक्षा की गारंटी अब कौन लेगा? क्या वे भी इसी तरह के 'अजूबे' हैं?
खटखरी की यह घटना मऊगंज जिला प्रशासन के लिए एक बड़ी चेतावनी है। यदि समय रहते निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की उच्च स्तरीय जांच नहीं की गई, तो भविष्य में ऐसे 'विकास' विनाश का कारण बन सकते हैं।
