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| मऊगंज की पहचान पर कुठाराघात: ‘अजूबा’ डिवाइडर और स्ट्रीट लाइटों की दुर्दशा से आहत हो रही जनभावनाएं Aajtak24 News |
मऊगंज - नवगठित मऊगंज जिले को 'विकसित मऊगंज' बनाने की परिकल्पना के साथ शुरू किए गए शुरुआती विकास कार्यों पर अब ग्रहण लगता दिखाई दे रहा है। जिला मुख्यालय की सड़कों पर लगे डिवाइडर और स्ट्रीट लाइट पोल, जिन्हें स्थानीय लोग व्यंग्य में 'दुनिया का दसवां अजूबा' कहते हैं, भारी वाहनों की चपेट में आकर लगातार क्षतिग्रस्त हो रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि संबंधित विभाग सब कुछ देखते हुए भी 'धृतराष्ट्र' की मुद्रा में बैठा है।
स्पेस टेक्नोलॉजी या निर्माण की लापरवाही?
नगर वासियों का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सदन में जिस 'स्पेस टेक्नोलॉजी' के जरिए रोड इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने की बात करते हैं, उसका साक्षात उदाहरण मऊगंज के इस डिवाइडर में देखने को मिलता है। विंध्य के नामी संविदाकार रतनलाल जी द्वारा निर्मित यह डिवाइडर इतना 'अद्भुत और अकल्पनीय' है कि बाहर से आने वाले रिश्तेदार कुशलक्षेम पूछने से पहले अचंभित होकर यह पूछते हैं कि आखिर सड़क के बीचों-बीच यह क्या बना है?
विकास की वेदी पर सुरक्षा की बलि
यह तथाकथित 'अजूबा' डिवाइडर अपने निर्माण के शुरुआती दिनों से ही विवादों और दुर्घटनाओं का केंद्र रहा है। इस डिवाइडर से टकराकर दर्जनों लोग गंभीर रूप से घायल हुए, जिन्हें इलाज के लिए नागपुर तक जाना पड़ा। कुछ लोग तो इस निर्माण की 'अद्भुत' बनावट के कारण लंबे समय तक कोमा में रहे। अब भारी वाहन चालक लगातार इस संरचना को टक्कर मारकर क्षतिग्रस्त कर रहे हैं, जिससे विकास कार्य सड़क किनारे मलबे के रूप में पड़ा नजर आता है।
प्रशासन से अपील और 'पुरस्कार' की मांग
मऊगंज की शान कहे जाने वाले इन विकास कार्यों की दुर्गति देख नगर वासियों की भावनाएं आहत हो रही हैं। स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन से इस 'धरोहर' को बचाने की अपील की है। साथ ही, तंज कसते हुए यह मांग भी की है कि ऐसी अनोखी तकनीक का इस्तेमाल करने वाले संविदाकार को भले ही 'भारत रत्न' न मिले, लेकिन 'मध्य प्रदेश रत्न' के अवार्ड से जरूर नवाजा जाना चाहिए। नगर वासियों का सवाल है कि विधायक प्रदीप पटेल के अथक प्रयासों से बने इस जिलास्तरीय विकास कार्य को आखिर कब तक भारी वाहनों की गुस्ताखी और प्रशासनिक अनदेखी का शिकार होना पड़ेगा?
