रीवा मेडिकल कॉलेज की बैठक में 'विस्फोट': डिप्टी सीएम ने डीन की नीयत पर उठाए सवाल Aajtak24 News

रीवा मेडिकल कॉलेज की बैठक में 'विस्फोट': डिप्टी सीएम ने डीन की नीयत पर उठाए सवाल Aajtak24 News

रीवा -  विंध्य के सबसे प्रतिष्ठित श्याम शाह मेडिकल कॉलेज (SSMC) की जनरल काउंसिल (GC) की बैठक उस समय रणक्षेत्र में तब्दील हो गई, जब प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और चिकित्सा शिक्षा मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने कॉलेज प्रबंधन की कार्यप्रणाली की धज्जियां उड़ा दीं। करोड़ों रुपये के लंबित भुगतान और फाइलों को दबाकर बैठने के मामले में डिप्टी सीएम ने डीन डॉ. सुनील अग्रवाल को आड़े हाथों लेते हुए उनकी 'मंशा' पर सीधे प्रहार किया। बैठक में मौजूद सांसद और विधायकों के तीखे तेवरों ने साफ कर दिया कि कॉलेज प्रशासन में चल रही 'कुंड़ली' मारने की प्रथा अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

दिग्गजों के बीच खिंचीं तलवारें

कमिश्नर कार्यालय में आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला के अलावा सांसद जनार्दन मिश्रा, मऊगंज विधायक प्रदीप पटेल, चिकित्सा शिक्षा संचालक (DME) और जिले के आला अधिकारी मौजूद थे। बैठक का एजेंडा कॉलेज के विकास कार्यों की समीक्षा था, लेकिन जैसे ही निर्माण कार्यों के भुगतान का मुद्दा उठा, चर्चा का रुख व्यक्तिगत आरोपों और तीखी फटकार की ओर मुड़ गया।

करोड़ों के बिल और डीन की 'चुप्पी'

हंगामे की मुख्य जड़ पीडब्लूडी (E&M) के इंजीनियर विनोद तिवारी और अन्य निर्माण एजेंसियों के वे बिल थे, जो महीनों से डीन कार्यालय की धूल फांक रहे हैं। बैठक में यह तथ्य उजागर हुआ कि तकनीकी रूप से सही होने के बावजूद करोड़ों रुपये का भुगतान जानबूझकर अटकाया गया है।

जब मऊगंज विधायक प्रदीप पटेल ने डीन से इस देरी का ठोस कारण पूछा, तो डॉ. सुनील अग्रवाल बगले झांकने लगे। सूत्रों के अनुसार, डीन ने पहले जिम्मेदारी मातहतों पर थोपने की कोशिश की, लेकिन जब उनसे पूछा गया कि फाइलें उनके टेबल पर कितने दिनों से लंबित हैं, तो वे निरुत्तर हो गए।

डिप्टी सीएम का सीधा प्रहार: "क्या अनुचित लाभ की है उम्मीद?"

डीन की हीलाहवाली और गोलमोल जवाबों से उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला का पारा चढ़ गया। उन्होंने भरी सभा में गरिमा को दरकिनार करते हुए डीन को कड़ी फटकार लगाई। शुक्ला ने तल्ख लहजे में कहा:

"आपकी मंशा ठीक नहीं दिखती। आखिर इन जायज और प्रमाणित भुगतानों को रोकने के पीछे आपका असल उद्देश्य क्या है? क्या आप इन फाइलों को क्लियर करने के बदले किसी अनुचित लाभ (रिश्वत या कमीशन) की उम्मीद कर रहे हैं? सरकारी काम में इस तरह की बाधा डालना सीधे तौर पर भ्रष्टाचार की श्रेणी में आता है।"

उपमुख्यमंत्री के इस सीधे हमले ने बैठक में सन्नाटा खींच दिया। सांसद जनार्दन मिश्रा ने भी सुर में सुर मिलाते हुए कहा कि अधिकारियों की तानाशाही के कारण विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं और वेंडरों में सरकार के प्रति गलत संदेश जा रहा है।

अड़ियल रवैये से विकास पर ब्रेक

विधायक प्रदीप पटेल ने आरोप लगाया कि डीन के अड़ियल रवैये और 'लालफीताशाही' के कारण न केवल ठेकेदारों का नुकसान हो रहा है, बल्कि कॉलेज की अधोसंरचना और स्वास्थ्य सेवाओं पर भी बुरा असर पड़ रहा है। इंजीनियरों ने शिकायत की है कि भुगतान न होने के कारण मेंटेनेंस और नए निर्माण कार्य ठप पड़े हैं।

कार्रवाई की लटकी तलवार: क्या जाएगी डीन की कुर्सी?

बैठक के बाद प्रशासनिक गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि डॉ. सुनील अग्रवाल की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। उपमुख्यमंत्री के तल्ख तेवरों और खुलेआम भ्रष्टाचार की आशंका जताने के बाद, शासन स्तर पर डीन के खिलाफ विभागीय जांच (DE) शुरू करने की तैयारी है। माना जा रहा है कि आगामी कुछ दिनों में डीन को पद से हटाया जा सकता है या उनके विरुद्ध कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई के आदेश जारी हो सकते हैं।

Post a Comment

Previous Post Next Post