| शिक्षा के मंदिर का कलंक: छात्रा से दरिंदगी की कोशिश करने वाला पीटीआई शिक्षक और मददगार होटल मैनेजर सलाखों के पीछे Aajtak24 News |
रीवा - रीवा जिले के बैकुंठपुर थाना क्षेत्र से मानवता को शर्मसार करने वाली एक घटना सामने आई है, जहाँ एक रक्षक ही भक्षक बन गया। खेल प्रतियोगिता का झांसा देकर एक नाबालिग छात्रा की अस्मत से खिलवाड़ करने की कोशिश करने वाले पीटीआई (PTI) शिक्षक और इस कुकृत्य में उसका साथ देने वाले होटल मैनेजर को पुलिस ने महज 24 घंटे के भीतर गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस अधीक्षक के कड़े रुख के बाद बैकुंठपुर पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई ने अपराधियों के मंसूबों पर पानी फेर दिया है।
खेल के नाम पर 'खौफनाक' साजिश
घटना की शुरुआत 18 मार्च 2026 को हुई, जब मझगवां शासकीय स्कूल में पदस्थ पीटीआई शिक्षक सुखदेव सिंह ने अपनी ही शिष्या के साथ विश्वासघात किया। शिक्षक ने नाबालिग छात्रा को विश्वास में लिया कि रीवा में एक बड़ी खेलकूद प्रतियोगिता आयोजित होने वाली है, जिसमें उसे शामिल होना है। भोली-भाली छात्रा अपने भविष्य और खेल के प्रति उत्साह के कारण शिक्षक के साथ जाने को तैयार हो गई। आरोपी उसे रीवा ले गया और वहां एक होटल के कमरे में ले जाकर उसके साथ छेड़छाड़ शुरू कर दी और दुष्कर्म का प्रयास किया।
मैनेजर की संलिप्तता: मदद के बजाय दी धमकी
होटल के कमरे में जब छात्रा ने खुद को असुरक्षित महसूस किया, तो वह किसी तरह दरिंदे शिक्षक के चंगुल से छूटकर बाहर भागी। वह मदद की उम्मीद में होटल मैनेजर अशोक वाधवानी के पास पहुँची और रोते हुए अपनी आपबीती सुनाई। लेकिन मानवता यहाँ भी शर्मसार हुई; मैनेजर ने मदद करने या पुलिस को सूचना देने के बजाय छात्रा को ही डराया-धमकाया। आरोप है कि मैनेजर ने चंद रुपयों के लालच में न केवल कमरा उपलब्ध कराया, बल्कि अपराध को छिपाने के लिए पीड़ित बच्ची को वहां से भगा दिया।
परिजनों का साहस और पुलिस का एक्शन
डरी-सहमी छात्रा किसी तरह अपने घर पहुँची और अपनी माँ को सारी बात बताई। 20 मार्च को पिता के लौटने के बाद परिजनों ने बिना देर किए बैकुंठपुर थाने में मामला दर्ज कराया। रीवा पुलिस अधीक्षक ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए तत्काल गिरफ्तारी के निर्देश दिए। एसडीओपी सिरमौर के मार्गदर्शन में एक विशेष टीम गठित की गई, जिसने घेराबंदी कर आरोपी शिक्षक सुखदेव सिंह और मैनेजर अशोक वाधवानी को धर दबोचा।
कानूनी कार्रवाई और पुलिस टीम की सराहना
दोनों आरोपियों के विरुद्ध पॉक्सो एक्ट और अन्य गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज कर उन्हें न्यायालय में पेश किया गया, जहाँ से उन्हें जेल भेज दिया गया है। इस पूरी कार्रवाई में बैकुंठपुर थाना प्रभारी उप निरीक्षक घनश्याम मिश्रा के नेतृत्व में सउनि मनोज बागरी, सउनि ऊषा वर्मा, प्रधान आरक्षक वीरेन्द्र तिवारी, आरक्षक आशुतोष मिश्रा, शशांक यादव और महिला आरक्षक रंजना त्रिपाठी की भूमिका अत्यंत सराहनीय रही।
समाज के लिए चेतावनी
यह घटना न केवल शिक्षा विभाग के लिए एक बड़ा धब्बा है, बल्कि होटलों में बिना उचित जांच-पड़ताल के नाबालिगों को कमरा देने वाली मानसिकता पर भी कड़ा प्रहार करती है। स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि ऐसे दरिंदों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए ताकि भविष्य में कोई गुरु अपनी शिष्या के विश्वास का कत्ल करने की हिम्मत न कर सके।