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| 'गढ़' बना गंदगी का गढ़: स्वच्छता के करोड़ों डकार गई पंचायत, शोपीस बने सफाई वाहन Aajtak24 News |
रीवा - मध्य प्रदेश सरकार जहाँ एक ओर स्वच्छता सर्वेक्षण में अव्वल आने के लिए करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा रही है, वहीं रीवा जिले की जनपद पंचायत गंगेव की सबसे बड़ी ग्राम पंचायत 'गढ़' विकास के दावों की पोल खोल रही है। आज यह पंचायत अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है और जिम्मेदार अधिकारी कुंभकर्णी नींद में सोए हुए हैं।
कागजों पर 'चकाचक', धरातल पर 'नरक'
गढ़-नईगढ़ी मार्ग, जो क्षेत्र की जीवनरेखा माना जाता है और 24 घंटे यात्रियों की आवाजाही से गुलजार रहता है, आज गंदगी के अंबार में तब्दील हो चुका है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि पंचायत में स्वच्छता के नाम पर केवल खानापूर्ति की जा रही है। जल निकासी की व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। नालियां कचरे से पटी पड़ी हैं, जिसके कारण सड़ांध मारता गंदा पानी सड़कों पर बह रहा है। राहगीरों को इस नरक के बीच से गुजरने पर मजबूर होना पड़ रहा है, जिससे संक्रामक बीमारियों का खतरा तेजी से मंडराने लगा है।
करोड़ों के वाहन बने 'शोपीस', कमीशन की भेंट चढ़ी योजना
ग्रामीणों का सबसे गंभीर आरोप पंचायत को मिले स्वच्छता वाहनों को लेकर है। कचरा संग्रहण के लिए लाखों की लागत से खरीदे गए वाहन आज कचरे के ढेर में खड़े 'शोपीस' बनकर रह गए हैं। चर्चा है कि इन वाहनों की खरीदी और योजनाओं के क्रियान्वयन में केवल 'कमीशन का खेल' चला है। जनता का कहना है कि सफाई अभियान सिर्फ सरकारी फाइलों और फोटो खिंचवाने तक सीमित है, जबकि हकीकत में कचरा उठाने वाला कोई नहीं है।
प्रशासन की चुप्पी और जनता का आक्रोश
जनपद की सबसे बड़ी पंचायत होने के नाते उम्मीद थी कि यहाँ आदर्श व्यवस्थाएं होंगी, लेकिन स्थिति इसके ठीक उलट है। अधिकारियों की रहस्यमयी चुप्पी ने भ्रष्टाचार की आशंकाओं को और बल दे दिया है।
स्थानीय नागरिकों के सवाल:
क्या स्वच्छता के नाम पर आने वाला बजट केवल अधिकारियों और बिचौलियों की जेब भरने के लिए है?
आखिर कब तक हजारों राहगीर और ग्रामीण इस नारकीय स्थिति में रहने को मजबूर होंगे?
क्या जिला प्रशासन इस 'कमीशनराज' की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करेगा?
क्षेत्र की जनता ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। ग्रामीणों का साफ कहना है कि यदि जल्द ही नालियों की सफाई और सड़कों से गंदगी नहीं हटाई गई, तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
