मऊगंज में 'खाकी' के साये में लकड़ी तस्करी का खेल: 5 घंटे तक छिपाई गई खबर, दो आरक्षक लाइन अटैच Aajtak24 News

मऊगंज में 'खाकी' के साये में लकड़ी तस्करी का खेल: 5 घंटे तक छिपाई गई खबर, दो आरक्षक लाइन अटैच Aajtak24 News

मऊगंज - नवागत मऊगंज जिले में लकड़ी हेराफेरी के एक ऐसे संगठित नेटवर्क का खुलासा हुआ है जिसने पुलिस की कार्यप्रणाली पर ही सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। करोड़ों की लकड़ी को ठिकाने लगाने की साजिश में ट्रक ड्राइवर समेत दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है, लेकिन इस पूरी कार्रवाई के दौरान पुलिसकर्मियों की संदिग्ध भूमिका ने महकमे में हड़कंप मचा दिया है। मामले में गंभीर लापरवाही और जानकारी छिपाने के आरोप में एसपी ने दो आरक्षकों को लाइन अटैच कर विभागीय जांच के आदेश दिए हैं।

5 घंटे का रहस्यमयी सन्नाटा: क्या दबाने की थी कोशिश?

घटनाक्रम के अनुसार, 19 मार्च को दोपहर करीब 3:30 बजे मऊगंज पुलिस को पंजाब नंबर के एक संदिग्ध ट्रक (PB-07-S-8251) की सूचना मिली थी। थाना प्रभारी के निर्देश पर दो आरक्षक रकरी गांव स्थित एक ढाबे के पास पहुँचे। चौंकाने वाली बात यह है कि शाम 4 बजे से रात 9 बजे तक, यानी पूरे 5 घंटे तक इस बड़ी कार्रवाई की सूचना किसी भी वरिष्ठ अधिकारी को नहीं दी गई। जब सोशल मीडिया पर खबर वायरल हुई, तब कहीं जाकर पुलिस अधीक्षक दिलीप सोनी ने संज्ञान लिया और फाइलें आगे बढ़ीं।

जीपीएस ट्रैकिंग ने खोला साजिश का राज

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विक्रम सिंह ने प्रेस वार्ता में बताया कि प्रयागराज के व्यापारी श्याम सुंदर प्रसाद की शिकायत पर जांच शुरू हुई। कोलकाता से बरेली जा रहे इस ट्रक में करीब 18 लाख रुपये की लकड़ी लोड थी। ट्रक ड्राइवर यशपाल सिंह ने अपने साथी चंदन जायसवाल (बिहार) के साथ मिलकर लूट की झूठी कहानी रची और जीपीएस बंद करने की कोशिश की। हालांकि, व्यापारी की सतर्कता और जीपीएस ट्रैकिंग के कारण लोकेशन मऊगंज के रकरी गांव में मिली, जहाँ हाइड्रा मशीन से लकड़ी उतारी जा रही थी।

चंदन की लकड़ी का संदेह और आरक्षकों पर गाज

सूत्रों का दावा है कि इस ट्रक में वैध लकड़ी की आड़ में अवैध चंदन जैसी बेशकीमती लकड़ी होने की भी आशंका है, जिसकी तलाश कई जिलों की पुलिस कर रही थी। ढाबे के पीछे गुपचुप तरीके से की जा रही इस 'जांच' ने आरक्षक शशिकांत रजक और सुरेश यादव को कटघरे में खड़ा कर दिया है। एसपी ने दोनों को तत्काल प्रभाव से लाइन अटैच कर दिया है। चर्चा है कि यदि इन आरक्षकों का कॉल डिटेल (CDR) खंगाला गया, तो कई 'सफेदपोश' चेहरे बेनकाब हो सकते हैं।

थाना प्रभारी की कार्यशैली फिर सवालों के घेरे में

इस पूरे घटनाक्रम ने मऊगंज थाना प्रभारी संदीप भारतीय की भूमिका पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि पुलिस का कहना है कि कार्रवाई के वक्त वे मौके पर नहीं थे, लेकिन थाने के स्टाफ द्वारा 5 घंटे तक जानकारी छिपाना उनके नेतृत्व पर बड़ा सवाल है। बता दें कि थाना प्रभारी पहले भी मारपीट और अभद्रता के आरोपों के कारण विवादों में रहे हैं।



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