मऊगंज का 'वॉटर स्कैम': कागजों पर लगा प्रतिबंध, जमीन के सीने में गूंज रही अवैध बोरिंग की मशीनें! Aajtak24 News

मऊगंज का 'वॉटर स्कैम': कागजों पर लगा प्रतिबंध, जमीन के सीने में गूंज रही अवैध बोरिंग की मशीनें! Aajtak24 News

मऊगंज - जिले में बढ़ते जल संकट को देखते हुए कलेक्टर द्वारा जारी प्रतिबंधात्मक आदेश वर्तमान में एक बड़ी 'अग्निपरीक्षा' के दौर से गुजर रहे हैं। प्रशासन ने कागजों पर तो बोरिंग मशीनों के पहियों को रोकने का दावा किया है, लेकिन धरातल पर हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। राजस्व और पुलिस विभाग की कथित 'मौन सहमति' के साये में रात के अंधेरे से लेकर दिन के उजाले तक मशीनों की गूंज प्रशासन के दावों की पोल खोल रही है।

डेटा का 'अकाल', कैसे रुकेगा उत्खनन?

सबसे बड़ा और यक्ष प्रश्न यह है कि जब प्रशासन के पास जिले में मौजूद निजी और सरकारी बोरवेलों का सटीक डेटा ही नहीं है, तो वह अवैध खनन की पहचान कैसे करेगा? सरकारी फाइलों में कितने हैंडपंप चालू हैं और कितने केवल कागजों पर जीवित हैं, इसकी जानकारी सार्वजनिक न होना भ्रष्टाचार की आशंकाओं को बल देता है। बिना बेसलाइन डेटा के, जून के बाद यह पता लगाना नामुमकिन होगा कि प्रतिबंध की अवधि में कितनी नई बोरिंग चोरी-छिपे कर ली गई।

मिलीभगत का 'मौन' खेल

स्थानीय रसूखदारों और रसूखदार मशीन मालिकों की पहुँच प्रशासन के गलियारों तक इतनी गहरी है कि प्रतिबंध केवल आम आदमी के लिए 'फांस' बनकर रह गया है। आरोप लग रहे हैं कि कुछ विभागों की 'प्रत्यक्ष कृपा' से ही अवैध उत्खनन का कारोबार फल-फूल रहा है। ऐसे में कलेक्टर का आदेश केवल एक औपचारिक दस्तावेज बनकर रह गया है, जिसका असली असर जून की तपिश में जल स्तर गिरने पर ही साफ होगा।

प्रशासन के सामने खड़े कड़े सवाल:

  • क्या जिले के चालू और बंद हैंडपंपों की सूची सार्वजनिक कर पारदर्शिता दिखाई जाएगी?

  • अब तक अवैध बोरिंग की शिकायतों पर कितनी मशीनों को 'जब्त' कर एफआईआर (FIR) दर्ज की गई?

  • निगरानी में विफल रहने वाले राजस्व और पुलिस अधिकारियों की जवाबदेही कब तय होगी?

आजतक 24 का कड़ा रुख: अगर समय रहते निगरानी तंत्र को मजबूत नहीं किया गया और डेटा को डिजिटल नहीं बनाया गया, तो मऊगंज का भूजल स्तर रसूखदारों के 'लालच' की भेंट चढ़ जाएगा।

Post a Comment

Previous Post Next Post