गढ़ पंचायत में विकास की बलि चढ़ा सरकारी धन: 20 सालों से जारी है 'बंदरबांट' का खेल Aajtak24 News

गढ़ पंचायत में विकास की बलि चढ़ा सरकारी धन: 20 सालों से जारी है 'बंदरबांट' का खेल Aajtak24 News

रीवा - जनपद पंचायत गंज के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत गढ़ इन दिनों विकास कार्यों में भारी अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोपों के केंद्र में है। ग्रामीणों ने पंचायत के पूर्व और वर्तमान जिम्मेदारों पर सीधा हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि पिछले 20 वर्षों में गाँव की बुनियादी सुविधाओं और सौंदर्यीकरण के नाम पर करोड़ों रुपयों की निकासी की गई, लेकिन हकीकत में गाँव आज भी बदहाली के आंसू बहा रहा है।

तालाब सौंदर्यीकरण: दो दशकों का 'कागजी' खेल

गाँव के मुख्य तालाब की स्थिति भ्रष्टाचार की सबसे बड़ी गवाह है। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले दो दशकों में जो भी सरपंच पद पर बैठा, उसने तालाब सौंदर्यीकरण के नाम पर मोटी रकम डकारी। आज स्थिति यह है कि तालाब में गंदगी और झाड़ियों का अंबार लगा है। सौंदर्यीकरण के नाम पर यहाँ एक पत्थर तक नहीं लगा, जबकि सरकारी रिकॉर्ड में इसे आदर्श तालाब बनाने के लिए बार-बार फंड निकाला गया।

निर्माण अधूरा, भुगतान पूरा

भ्रष्टाचार का यह खेल केवल तालाब तक सीमित नहीं है। पंचायत में कई ऐसे प्रोजेक्ट्स हैं जो आधे-अधूरे पड़े हैं, लेकिन कागजों में उन्हें 'पूर्ण' दिखाकर राशि हड़प ली गई है:

  • यात्री प्रतीक्षालय: पूर्व सरपंच के कार्यकाल में शुरू हुआ यह निर्माण आज भी अधूरा है, जबकि इसका पूरा पैसा निकाला जा चुका है।

  • कन्या हाई स्कूल बाउंड्री: छात्राओं की सुरक्षा के लिए स्वीकृत बाउंड्री वॉल का पैसा तो निकला, लेकिन निर्माण कार्य आज भी अधूरा पड़ा है।

  • पुराना पंचायत भवन और हाट बाजार: इन दोनों परियोजनाओं में करोड़ों के घोटाले की बू आ रही है। हाट बाजार अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है और पुराना भवन खंडहर में तब्दील हो चुका है।

प्रशासनिक चुप्पी पर सवाल

ग्रामीणों का कहना है कि यह सब प्रशासन की नाक के नीचे हो रहा है। करोड़ों रुपयों की बंदरबांट के बावजूद आज तक किसी भी जिम्मेदार पर कड़ी कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों ने अब जिला प्रशासन और लोकायुक्त से इस पूरे 20 वर्षीय कार्यकाल की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है, ताकि जनता के खून-पसीने की कमाई को डकारने वाले चेहरों को बेनकाब किया जा सके।






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