रीवा-मनगवां तहसील के नायब तहसीलदार के स्थगन आदेश की अनदेखी का आरोप, पुलिस-राजस्व समन्वय पर उठे सवाल Aajtak24 News

रीवा-मनगवां तहसील के नायब तहसीलदार के स्थगन आदेश की अनदेखी का आरोप, पुलिस-राजस्व समन्वय पर उठे सवाल Aajtak24 News


रीवा - जिले की मनगवां तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत रक्सा माजन में शासकीय भूमि पर कथित अवैध निर्माण को लेकर गंभीर विवाद खड़ा हो गया है। ग्राम निवासी राजेंद्र सिंह ने आरोप लगाया है कि ग्राम माल स्थित शासकीय प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक शाला परिसर की भूमि (आराजी नंबर 415/1) के एक हिस्से पर पंचायत भवन का निर्माण कार्य नायब तहसीलदार द्वारा जारी स्थगन आदेश के बावजूद जारी है। शिकायतकर्ता का कहना है कि प्रशासनिक आदेशों की अवहेलना खुलेआम की जा रही है, जिससे शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लग रहे हैं।


क्या है पूरा मामला?


राजेंद्र सिंह के अनुसार, संबंधित भूमि शासकीय विद्यालय के नाम दर्ज है और विद्यालय परिसर में पहले से आंगनबाड़ी, मध्यान्ह भोजन किचन, शौचालय तथा जल निगम की टंकी निर्मित है। परिसर में उपलब्ध भूमि सीमित है। ऐसे में यदि उसी स्थान पर पंचायत भवन का निर्माण किया जाता है तो विद्यार्थियों की पढ़ाई, खेलकूद गतिविधियों और भविष्य के विकास कार्यों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने बताया कि निर्माण कार्य शुरू होने पर उन्होंने राजस्व न्यायालय में आपत्ति दर्ज कराई थी। इसके बाद नायब तहसीलदार, तहसील मनगवां (वृत्त गढ़) द्वारा दिनांक 05 फरवरी 2026 को स्थगन आदेश जारी किया गया था, जिसमें स्पष्ट रूप से निर्माण कार्य पर रोक लगाने के निर्देश दिए गए थे। आदेश की प्रतिलिपि थाना गढ़, अनुविभागीय अधिकारी (पुलिस) मनगवां तथा अन्य संबंधित अधिकारियों को प्रेषित की गई।


18 फरवरी को फिर जारी हुआ पत्र


शिकायतकर्ता के अनुसार, स्थगन आदेश के बावजूद निर्माण कार्य बंद नहीं हुआ। इस पर उन्होंने पुनः आवेदन प्रस्तुत किया। इसके बाद पत्र क्रमांक 138/प्रवा०/2026, दिनांक 18.02.2026 के माध्यम से नायब तहसीलदार ने अनुविभागीय अधिकारी (पुलिस) मनगवां को स्थगन आदेश का पालन सुनिश्चित कराने हेतु पत्र प्रेषित किया। पत्र में उल्लेख किया गया कि आवेदक ने जानकारी दी है कि अनावेदकगण द्वारा स्थगन के बावजूद निर्माण कार्य जारी है। इसके बावजूद, शिकायतकर्ता का आरोप है कि मौके पर न तो प्रभावी पुलिस हस्तक्षेप हुआ और न ही राजस्व अमले द्वारा निर्माण रुकवाया गया।


पुलिस और राजस्व विभाग की भूमिका पर सवाल


राजेंद्र सिंह का कहना है कि थाना स्तर पर केवल नोटिस तामील करने की कार्रवाई की गई है। पुलिस का कथित रूप से कहना है कि उनका कार्य केवल नोटिस की तामील तक सीमित है, जबकि निर्माण रुकवाने की जिम्मेदारी राजस्व विभाग की है। दूसरी ओर, राजस्व अमले का कहना है कि आदेश के पालन के लिए पुलिस की सहायता आवश्यक है। इस समन्वय के अभाव में निर्माण कार्य जारी रहने का आरोप लगाया जा रहा है। शिकायतकर्ता ने यह भी कहा कि जब पटवारी मौके पर पहुंचे तो विवाद की स्थिति बनी, जिसके बाद नियमित जांच नहीं हो सकी।


अधिवक्ता की प्रतिक्रिया


मामले में अधिवक्ता संघ मनगवां के पूर्व अध्यक्ष प्रभात चंद द्विवेदी ने बताया कि संबंधित भूमि शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय के नाम दर्ज है और राजस्व अभिलेखों में किसी प्रकार का वैध परिवर्तन दर्ज नहीं है। उन्होंने कहा कि तहसीलदार एवं एसडीएम स्तर से भी स्थगन की पुष्टि की जा चुकी है। यदि इसके बावजूद निर्माण जारी है तो यह न्यायालयीन आदेश की अवहेलना की श्रेणी में आ सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि तहसीलदार के आदेश का पालन कराना पुलिस प्रशासन का दायित्व है और पुलिस को मौके पर जाकर निर्माण कार्य रुकवाकर पालन प्रतिवेदन प्रस्तुत करना चाहिए।


ग्रामीणों की चिंता


ग्रामीणों का कहना है कि विवाद की स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो गांव में तनाव बढ़ सकता है। उनका आग्रह है कि जिला प्रशासन, संभागीय आयुक्त तथा वरिष्ठ पुलिस अधिकारी इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर स्थिति स्पष्ट करें। शिकायतकर्ता ने दोहराया कि उन्हें पंचायत भवन निर्माण से कोई आपत्ति नहीं है, बशर्ते वह अन्य उपलब्ध शासकीय भूमि पर कराया जाए। उनका विरोध केवल विद्यालय परिसर में निर्माण को लेकर है, जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो सकती है।


प्रशासन से अपेक्षा


यह मामला केवल एक गांव का विवाद नहीं, बल्कि शासकीय भूमि की सुरक्षा, राजस्व अभिलेखों की वैधता और प्रशासनिक आदेशों के पालन से जुड़ा प्रश्न बन गया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जिला प्रशासन स्थगन आदेश के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए क्या कदम उठाता है और संबंधित विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर स्थिति को कैसे नियंत्रित करता है।




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