हजारों करोड़ स्वाहा, फिर भी हलक सूखा: रीवा-मऊगंज में 'जल जीवन मिशन' के दावों की खुली पोल Aajtak24 News


हजारों करोड़ स्वाहा, फिर भी हलक सूखा: रीवा-मऊगंज में 'जल जीवन मिशन' के दावों की खुली पोल Aajtak24 News

रीवा/मऊगंज - केंद्र और राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी 'जल जीवन मिशन' योजना, जिसका उद्देश्य हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाना है, रीवा और मऊगंज जिले में भ्रष्टाचार और लापरवाही की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। आंकड़ों के अनुसार, रीवा जिले में लगभग 12 हजार करोड़ और मऊगंज क्षेत्र में करीब 8 हजार करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि इस योजना पर खर्च की जा रही है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि आज भी हजारों ग्रामीण मैला और दूषित पानी पीने को मजबूर हैं।

पहाड़ी और आदिवासी अंचलों में हाहाकार

योजना के क्रियान्वयन में सबसे बड़ी विफलता रीवा और मऊगंज के दूरस्थ संताली और पहाड़ी क्षेत्रों में देखने को मिल रही है। यहाँ के आदिवासी परिवारों के लिए 'नल से जल' आज भी एक सपना बना हुआ है। तपती धूप हो या सामान्य दिन, यहाँ की महिलाएं और बच्चे मीलों पैदल चलकर जल स्रोतों से पानी ढोने को विवश हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि कागजों पर विकास की गंगा बह रही है, पर उनके कंठ आज भी सूखे हैं।

बीमारियों को न्योता: 20 साल से नहीं हुई टंकियों की सफाई

हैरान कर देने वाला तथ्य यह है कि कई क्षेत्रों में बनी जल टंकियों की सफाई दशकों से नहीं हुई है। ग्रामीणों के अनुसार, 15 से 20 वर्षों से टंकियां वैसी ही पड़ी हैं। रखरखाव के अभाव में टंकियों की सीढ़ियां टूट चुकी हैं और सुरक्षा जालियां गायब हैं। सिरमौर और गढ़ बाजार जैसे क्षेत्रों से आई शिकायतें रोंगटे खड़े कर देने वाली हैं; टंकियों में पक्षियों के मृत अवशेष और गंदगी गिर रही है, और वही दूषित पानी सीधे लोगों के घरों तक सप्लाई किया जा रहा है। यह स्थिति किसी बड़ी महामारी को खुला निमंत्रण दे रही है।

भ्रष्टाचार की बू और प्रशासनिक मौन

योजना के तहत बिछाई गई पाइपलाइनें कई जगह से फूट चुकी हैं, जिससे सरकारी धन की बर्बादी हो रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि घटिया निर्माण सामग्री और निगरानी की कमी के कारण योजना का लाभ अंतिम व्यक्ति तक नहीं पहुंच पा रहा है। ग्रामीण लंबे समय से शिकायत कर रहे हैं, लेकिन प्रशासन की चुप्पी से उनकी नाराजगी अब आक्रोश में बदल रही है।

जनता की प्रमुख मांगें:

क्षेत्र के जागरूक नागरिकों और ग्रामीणों ने प्रशासन से निम्नलिखित बिंदुओं पर तत्काल कार्रवाई की मांग की है:

  • इस 20 हजार करोड़ की योजना की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच हो।

  • सभी जल टंकियों की युद्धस्तर पर सफाई और मरम्मत कराई जाए।

  • पहाड़ी क्षेत्रों में जल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए वैकल्पिक और ठोस व्यवस्था हो।

  • जल की शुद्धता की नियमित लैब टेस्टिंग कर रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।

यदि समय रहते इन जर्जर टंकियों और ठप पड़ी पाइपलाइनों को दुरुस्त नहीं किया गया, तो हजारों करोड़ की यह योजना केवल फाइलों तक सीमित रह जाएगी और जनता का भरोसा सिस्टम से उठ जाएगा। अब गेंद प्रशासन के पाले में है कि वह इस 'प्यास' को बुझाता है या फिर भ्रष्टाचार की धूल में इसे और दबा देता है।



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