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| रीवा सुपर स्पेशलिस्ट अस्पताल में 'गुणवत्ता' पर बड़ा सवाल: करोड़ों की लागत, फिर भी निर्माण जर्जर, पिलर तिरछा, छज्जे गिरे Aajtak24 News |
रीवा/मध्य प्रदेश - रीवा में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के उद्देश्य से करोड़ों की लागत से बनाया गया सुपर स्पेशलिस्ट अस्पताल इन दिनों अपनी घटिया निर्माण गुणवत्ता के कारण चर्चाओं में है। जहां एक ओर आम जनता को बेहतर चिकित्सा सुविधा मिलने की उम्मीद थी, वहीं दूसरी ओर अस्पताल के भवन की जर्जर हालत ने भ्रष्टाचार की ओर इशारा किया है। विपक्षी दल और स्थानीय लोग निर्माण में भारी अनियमितता का आरोप लगा रहे हैं, जिसके कारण मरीजों की सुरक्षा पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े हो गए हैं।
150 करोड़ की परियोजना, पर गुणवत्ता अधूरी
यह सुपर स्पेशलिस्ट अस्पताल तत्कालीन केंद्र सरकार (कांग्रेस शासनकाल) द्वारा 150 करोड़ रुपये की लागत से रीवा जिले की स्वास्थ्य सुविधाओं को अत्याधुनिक बनाने के लिए स्वीकृत किया गया था। इसका उद्देश्य रीवा संभाग के नागरिकों को विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाएँ यहीं उपलब्ध कराना था। हालांकि, अस्पताल के भवन की वर्तमान स्थिति को देखकर लगता है कि शायद इस भारी-भरकम राशि का एक बड़ा हिस्सा निर्माण की गुणवत्ता पर खर्च होने के बजाय अन्यत्र चला गया।
लगातार गिर रहे छज्जे, अब पिलर भी तिरछा
पिछले कुछ समय से अस्पताल के अंदरूनी हिस्सों में निर्माण संबंधी खामियां लगातार सामने आ रही हैं। सूत्रों के अनुसार, पिछले एक महीने के भीतर अस्पताल के वार्डों में पांच बार छज्जे गिर चुके हैं। इन घटनाओं की खबरें स्थानीय समाचार पत्रों और चैनलों पर भी प्रकाशित हो चुकी हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। यह विडंबना ही कही जाएगी कि जहां छज्जे गिरने जैसी घटनाएं मामूली लगने लगें, वहीं रविवार को अस्पताल का एक महत्वपूर्ण पिलर तिरछा दिखाई दिया। यह पिलर अस्पताल की एक मुख्य दीवार को सहारा देता है, और इसके तिरछे होने से पूरी संरचना की सुरक्षा खतरे में पड़ गई है। दीवार गिरने की कगार पर आ चुकी है, जो किसी भी समय एक बड़े हादसे का कारण बन सकती है।
राजनीतिक बयानबाजी और जनता का आक्रोश
इस पूरे मामले को लेकर स्थानीय राजनीति भी गरमा गई है। कांग्रेस पार्टी, जिसने इस परियोजना के लिए राशि स्वीकृत कराई थी, ने प्रदेश की भाजपा सरकार और स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला पर निशाना साधा है। कांग्रेस का आरोप है कि स्वास्थ्य जैसी संवेदनFeel क्षेत्र में भी जनता के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। स्थानीय अधिवक्ता बी.के. माला ने इन घटनाओं पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि यह स्पष्ट रूप से भ्रष्टाचार का मामला है। उन्होंने कहा, "अगर एक साल के अंदर ही सुपर स्पेशलिस्ट अस्पताल की हालत इतनी जर्जर हो सकती है, तो यह कल्पना करना भी मुश्किल है कि यह निर्माण कार्य कितने घटिया मानकों पर किया गया है। अगर इमारत ढह गई तो जिम्मेदार कौन होगा? क्या सरकार सिर्फ मौन होकर तमाशा देखती रहेगी?"
सुरक्षा पर सवालिया निशान
यह अस्पताल मरीजों के इलाज के लिए संचालित हो रहा है। ऐसे में, भवन की जर्जर स्थिति मरीजों के जीवन के लिए सीधा खतरा पैदा करती है। आलोचक सवाल उठा रहे हैं कि क्या प्रशासन ने निर्माण के दौरान सुरक्षा मानकों की जांच की थी? दशकों से सुरक्षित खड़े संजय गांधी अस्पताल के विपरीत, यह नई इमारत इतनी जल्दी कैसे ढहने लगी, यह एक बड़ा सवाल है।
आगे की कार्रवाई और जांच की मांग
इस घटना ने ठेकेदार की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। जनता और विरोधी दलों की मांग है कि इस पूरे मामले की गहन मजिस्ट्रियल जांच हो और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही, यह भी सुनिश्चित किया जाए कि भविष्य में ऐसे निर्माण कार्यों में गुणवत्ता से कोई समझौता न हो। फिलहाल, अस्पताल प्रशासन और स्थानीय प्रशासन की ओर से इस गंभीर मामले पर विस्तृत प्रतिक्रिया का इंतजार है।
