जागरूकता की कमी के चलते ब्लड बैंक में बनी ब्लड की कमी | Jagrukta ki kami ke chalte blood bank main bani blood ki kami

जागरूकता की कमी के चलते ब्लड बैंक में बनी ब्लड की कमी

जागरूकता की कमी के चलते ब्लड बैंक में बनी ब्लड की कमी

डिंडौरी (पप्पू पड़वार) - स्वैच्छिक रक्तदान के प्रति जागरूकता की कमी होने के चलते लंबे समय से जिला अस्पताल स्थित ब्लड बैंक में अक्सर ब्लड की कमी बनी रहती है। वर्तमान में स्थिति यह है कि प्रतिदिन आठ से दस यूनिट ब्लड की जरुरत अस्पताल में भर्ती मरीजों को पड़ रही है। स्वैच्छिक रक्तदान और समय पर रक्तदाता के न मिलने से मरीजों सहित ब्लड बैंक में पदस्थ अमले को भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इन दिनों सबसे अधिक रक्त की जरुरत अस्पताल में भर्ती होने वाली प्रसूता महिलाओं को पड़ रही है। अस्पताल में भर्ती हो रहीं गर्भवती महिलाओं में हीमोग्लोबिन की कमी सामने आ रही है। जरुरत पड़ने पर सोशल मीडिया में संदेश वायरल होने के बाद जागरूक युवा जरुरतमंद मरीजों को रक्तदान के लिए पहुंचकर सहयोग कर रहे हैं। वर्तमान में ए और ओ पॉजिटिव समूह के ब्लड की कमी बनी हुई है। बताया गया कि निगेटिव समूह के रक्तदाता को जरुरत पड़ने पर ही बुलाया जाता है। कुछ मरीजों के स्वजन भी रक्तदान करने से पीछे हट जाते हैं, ऐसी स्थिति में स्टाफ को संबंधित समूह का रक्त उपलब्ध कराने में अधिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।


स्टाफ समेत पैथोलॉजिस्ट की कमी


जिला अस्पताल से सिविल सर्जन के पद से सेवानिवृत्त हुए डॉ. बीपी कोले ब्लड बैंक के पैथोलॉजिस्ट की भी जिम्मेदारी निभा रहे थे। उनके सेवानिृत्त होने के बाद ब्लड बैंक के पैथोलॉजिस्ट का पद भी खाली हो गया है। वर्तमान में ब्लड बैंक में कोई पैथोलॉजिस्ट नहीं है। इसके अलावा ब्लड बैंक में अन्य स्टाफ की भी कमी बनी हुई है। वर्तमान में ब्लड बैंक में एक स्टाफ नर्स और एक टेक्नीशयिन पदस्थ है। स्टाफ की कमी के चलते मरीजों के लिए रक्तदाता के ब्लड के सैंपल की जांच करने से लेकर ब्लड निकालने सहित अन्य कार्य महज दो कर्मचारी के भरोसे ही चल रहा है।


रक्तदान के लिए जागरूकता का अभाव


जानकारी के मुताबिक ब्लड बैंक में लगे फ्रीजरों में लगभग चार सौ यूनिट ब्लड स्टोर करने की क्षमता है। इसके बाद भी यहां हमेशा ब्लड की कमी बनी रहती है। स्वैच्छिक रक्तदान के प्रति जागरूकता और रक्तदान शिविर न लग पाने के लंबे समय से ब्लड के विभिन्ना्‌ समूह की कमी बनी रहती है। अस्पताल में भर्ती होने वाले दुर्घटनाग्रस्त, थैलीसीमिया सहित गर्भवती महिलाओं को ब्लड की जरुरत पड़ने पर ब्लड बैंक में पदस्थ नर्स, अस्पताल के अन्य स्टाफ के साथ जागरूक युवा सोशल मीडिया में तत्काल संदेश वायरल कर देते हैं। संबंधित ब्लड ग्रुप का व्यक्ति अस्पताल पहुंचकर रक्तदान कर मरीजों की जान बचाने में सहयोग करते हैं। सोमवार को भी जिला अस्पताल में इलाजरत दो महिला को ए और ओ पॉजिटिव रक्त की जरुरत का संदेश सोशल मीडिया पर वायरल हुआ।


मशीनें लग जाने से मिलेगा लाभ


अक्टूबर माह को रक्तदान माह के तौर पर प्रतिवर्ष मनाया जाता है। इस वर्ष अभी तक एक दो रक्तदान संबंधी शिविर ही लग सके हैं। हांलाकि अस्पताल प्रबंधन द्वारा स्वैच्छिक रक्तदान के लिए कुछ विभागों व संगठनों को पत्र लिखकर रक्तदान करने की बात कही जा रही है, लेकिन इसके बाद भी लोगों में जागरूकता का अभाव नजर आ रहा है। जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में आधुनिक मशीनें लगाए जाने का कार्य इन दिनों जारी होना भी बताया जा रहा है। मशीनें लग जाने से ब्लड से की जाने वाली अधिकांश जांच स्थानीय स्तर पर होने से लोगों को लाभ मिलेगा।


इनका कहना है


सेवानिवृत्त हो चुके डॉ. बीपी कोले को एक्सटेंशन पर जिला अस्पताल में पदस्थ करने का पत्र शासन को भेजा गया था, लेकिन अभी तक कोई आदेश नहीं आया है। रिमांडइर भी भेजा जा चुका है। कोविड केयर सेंटर में स्टाफ की पदस्थापना होने से टेक्नीशियन सहित अन्य स्टाफ की अस्पताल में कमी हो गई है। ब्लड बैंक में आधुनिक मशीनें लगाने के लिए कार्य जारी है। मशीनें लग जाने से स्टाफ भी कम होगा। ब्लड बैंक में ब्लड कमी पूरी करने के लिए रक्तदान शिविर लगाए जाने के प्रयास किए जा रहे हैं।


डॉ. रमेश मरावी

सिविल सर्जन डिंडौरी।

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