पूर्ण राजयोग में मना करवा चौथ, उद्यापन भी हुआ
धामनोद (मुकेश सोडानी) - करवा चौथ का व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण होता है। इस व्रत का महिलाओं को सालभर इंतजार रहता है। इस साल करवा चौथ का व्रत 17 अक्टूबर को मनाया गया। गौरतलब है कि कार्तिक मास की चतुर्थी को करवा चौथ के रूप में मनाए जाने की परंपरा है।
महिलाएं इस दिन निर्जला व्रत रखकर पति की दीर्घायु की कामना करती हैं।नगर में कई जगह सुहागिनें व्रत का उद्यापन भी किया गया। बताते हैं कि उद्यापन कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि में करवाचौथ को किया जाता है। इस दिन चतुर्थी माता और गणेशजी की भी पूजा की जाती है
चंद्रमा पर अन्य ग्रह की दृष्टि न पड़ने से बना पूर्ण राजयोग
चंद्रमा और बृहस्पति का दृष्टि संबंध होने से गजकेसरी नाम का राजयोग बनता है। ग्रहों की ऐसी स्थिति पिछले साल भी बनी थी, लेकिन बुध और केतु के कारण चंद्रमा के पीड़ित होने से राजयोग भंग हो गया था, लेकिन इस साल ऐसा नहीं हुआ बृहस्पति के अलावा चंद्रमा पर किसी भी अन्य ग्रह की दृष्टि नहीं पड़ने से पूर्ण राजयोग बन
महाभारत काल से है करवा चौथ व्रत की परंपरा
करवाचौथ की सबसे पहले शुरुआत सावित्री की पतिव्रता धर्म से हुई। सावित्री ने अपने पति मृत्यु हो जाने पर भी यमराज को उन्हें अपने साथ नहीं ले जाने दिया और अपनी दृढ़ प्रतिज्ञा से पति को फिर से प्राप्त किया। दूसरी कहानी पांडवों की प|ी द्रौपदी की है। वनवास काल में अर्जुन तपस्या करने नीलगिरि के पर्वत पर चले गए थे। द्रौपदी ने अर्जुन की रक्षा के लिए भगवान कृष्ण से मदद मांगी। उन्होंने द्रौपदी को वैसा ही उपवास रखने को कहा जैसा माता पार्वती ने भगवान शिव के लिए रखा था। द्रौपदी ने ऐसा ही किया और कुछ ही समय के पश्चात अर्जुन वापस सुरक्षित लौट आए नगर में कई जगह उद्यापन हुए डेवर मार्ग में ऋषि पटेल के निवास स्थान पर भी उद्यापन हुआ वहां 40 से अधिक जोड़ों ने पूजा अर्चना कर एक साथ भोजन किया
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