ढोलक और पपिया बजा कर कदम कदम पर दे रहे अमन-चैन का संदेश
धामनोद (मुकेश सोडानी) - नगर से गुजरते हुए एक 65 वर्षीय बुजुर्ग को हर कोई देख रहा था बुजुर्ग के हाथ में ढोलक थी मुंह में पपैया तथा देश भक्ति और देश के प्रतीक चिन्ह को लेकर जब वे आगे बढ़ रहै थे तो हर कोई यह जानना चाह रहा था यह आखिर यह कौन है बाद नगर के युवाओं ने उस 65 वर्षीय बुजुर्ग का स्वागत किया तो उसने अपना परिचय लक्ष्मण नामदेव गणवीर के रूप में बताया तथा बताया कि लगातार 35 वर्ष से वह इंदौर से शिरडी देश में अमन चैन और शांति रहे इस संदेश के साथ यात्रा कर रहे हैं
देशभक्ति का जुनून अनोखा / लक्ष्मण गणवीर में देशभक्ति का ऐसा जुनून देखने को मिला वह हर जगह देखने को नहीं मिलता राष्ट्र प्रेम और देश के सैनिकों के लिए मन में सम्मान लेकर लक्ष्मण नामदेव गणवीर ने बताया कि प्रतिवर्ष करीब 800 किलोमीटर की यात्रा इंदौर से शुरू होती है जिसमें ओंकारेश्वर उज्जैन महेश्वर मंडलेश्वर और रास्ते में जहां पर भी शिवलिंग मिलते हैं वहां पर देश में अमन चैन शांति के लिए अभिषेक कर आगे बढ़ते हैं प्रतिदिन 10 किलोमीटर की यात्रा तय करते हैं पूरी यात्रा तय करने में महीनों लग जाते हैं
भरा पूरा परिवार लेकिन राष्ट्रप्रेम के जुनून में डूब गए
बताया गया कि लक्ष्मण के दो बेटे तथा दो बेटियां हैं बेटियां की तो शादी हो चुकी है बेटे एलआईसी एजेंट तथा छोटा बेटा होटल मैनेजमेंट व्यवसाई है कई बार बच्चों ने इस तरह से बाहर आने के लिए इस उम्र में मना भी किया लेकिन गणवीर का देश के प्रति प्रेम कम नहीं हुआ वह लगातार हर वर्ष 6 महीने राष्ट्रीय प्रेम का संदेश देते हुए आगे बढ़ते हैं
हाथों में घुंगरू मुंह में पपैया और ढोलक बजाते हुए चलते हैं
लक्ष्मण का गणवेश भी अनोखा है एक साथ तीन तरह की मृदु करतल बजाते हुए वह आगे बढ़ते हैं उनके हाथों में घुंगरू और ढोलक तथा मुंह में पपैया बजती है जो राष्ट्रीय धुन से ओतप्रोत होती है वह यह देश है वीर जवानों के और जन गण मन के साथ अन्य कई राष्ट्रीय गीत प्रस्तुत करते हुए आगे बढ़ते हैं
जब पूछा कि भोजन कहां करते हो तो कहने लगे भगवान खिलाता है
लक्ष्मण गणवीर वैसे तो घर से संपन्न है लेकिन जब उनसे पूछा कि भोजन कहां करते हो तो उन्होंने बताया कि भोजन कि मुझे कोई कमी नहीं जहां भी रुक जाता हूं लोग मुझे आगे होकर भोजन खिलाते हैं मेरी दिनचर्या प्रतिदिन कैसे गुजर जाती है यह मुझे भी पता नहीं चलता करीब 35 वर्षों से यह देश के प्रति प्रेम मेरे अंदर जागृत है जो आगे भी रहेगा इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य देश के सैनिकों के प्रति सम्मान है
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