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| रीवा स्वास्थ्य विभाग में अटैचमेंट व्यवस्था पर प्रशासन सख्त, मूल पदस्थापना पर लौटने के निर्देश |
रीवा। स्वास्थ्य विभाग में अधिकारियों और कर्मचारियों की मूल पदस्थापना से अलग अन्य कार्यालयों में ड्यूटी एवं अटैचमेंट की व्यवस्था को लेकर प्रशासन ने सख्ती दिखाई है। क्षेत्रीय संचालक स्वास्थ्य सेवाएं, रीवा संभाग, डॉ. जी.एस. परिहार के निर्देशों के अनुपालन में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) रीवा डॉ. सुधाकर पाण्डेय ने 12 अक्टूबर 2026 को आदेश जारी कर संबंधित व्यवस्थाओं की समीक्षा और नियमों के अनुरूप कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
CMHO कार्यालय से जारी आदेश क्रमांक 20664 के अनुसार, अधिकारियों एवं कर्मचारियों को उनके मूल पदस्थापना स्थल से अन्यत्र कार्य पर लगाए जाने संबंधी ड्यूटी एवं अटैचमेंट आदेश तत्काल प्रभाव से निरस्त करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही संबंधित अधिकारियों को आदेश का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने और सात दिवस के भीतर पालन प्रतिवेदन प्रस्तुत करने को कहा गया है। आदेश में मूल पदस्थापना पर उपस्थिति के आधार पर वेतन आहरण की कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश भी शामिल हैं।
वर्षों से चली आ रही व्यवस्था की होगी समीक्षा
स्वास्थ्य विभाग में पदस्थापना और अटैचमेंट का विषय प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़ा है। किसी अधिकारी या कर्मचारी की नियुक्ति जिस संस्थान में की जाती है, वहां उसकी उपलब्धता स्थानीय स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन के लिए महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में मूल पदस्थापना से अलग दूसरे कार्यालयों में लंबे समय तक कार्य करने की व्यवस्था होने पर उसकी आवश्यकता, वैधता और सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति की समीक्षा जरूरी हो जाती है।
यदि किसी स्थान पर कर्मचारियों की कमी के कारण अस्थायी व्यवस्था बनाई गई थी, तो यह भी देखना आवश्यक है कि वह व्यवस्था कितने समय तक प्रभावी रही और उसकी समय-समय पर समीक्षा हुई या नहीं। प्रशासन के ताजा निर्देशों के बाद इन पहलुओं पर कार्रवाई की स्थिति महत्वपूर्ण होगी।
आदेश जारी होने के बाद अब अमल की परीक्षा
क्षेत्रीय संचालक डॉ. जी.एस. परिहार के निर्देश और CMHO डॉ. सुधाकर पाण्डेय की कार्रवाई के बाद अब विभागीय स्तर पर आदेश के अनुपालन पर नजर रहेगी। निर्धारित समय-सीमा में संबंधित अधिकारी और कर्मचारी मूल पदस्थापना स्थल पर कार्यभार ग्रहण करते हैं या नहीं, इसकी पुष्टि विभागीय अभिलेखों से हो सकेगी।
इसके लिए उपस्थिति पंजी, कार्यभार ग्रहण करने संबंधी दस्तावेज, वेतन आहरण अभिलेख और पूर्व में जारी अटैचमेंट आदेशों का मिलान महत्वपूर्ण रहेगा। यदि किसी मामले में नियमों से अलग व्यवस्था सामने आती है, तो संबंधित अभिलेखों और सक्षम प्राधिकारी के आदेश के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
अभिलाष शुक्ला की कार्य व्यवस्था भी समीक्षा का विषय
इसी संदर्भ में एड्स नियंत्रण कार्यक्रम से जुड़े निजी कर्मचारी अभिलाष शुक्ला के लंबे समय से CMHO कार्यालय में अटैच रहकर अस्पताल प्रबंधन एवं व्हीकल मैनेजमेंट जैसे कार्यों से जुड़े होने की बात भी सामने आती है। उनकी कार्य व्यवस्था, जिम्मेदारियों और संबंधित आदेशों की स्थिति को विभागीय अभिलेखों के आधार पर स्पष्ट किया जाना आवश्यक है।
इस मामले में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि उन्हें किन कार्यों की जिम्मेदारी किस आदेश के तहत सौंपी गई, संबंधित व्यवस्था के लिए सक्षम स्तर से स्वीकृति प्राप्त थी या नहीं और उनकी भूमिका निर्धारित नियमों के अनुरूप थी या नहीं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर किसी व्यक्ति की ओर से नियमों के उल्लंघन का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। वास्तविक स्थिति संबंधित दस्तावेजों और विभागीय जांच से ही स्पष्ट हो सकेगी।
सात दिन बाद सामने आएगी अनुपालन की स्थिति
स्वास्थ्य विभाग के इस आदेश की वास्तविक प्रभावशीलता उसके पालन से तय होगी। सात दिवस की समय-सीमा में पालन प्रतिवेदन प्रस्तुत होने के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि कितने मामलों में अटैचमेंट आदेश निरस्त किए गए, संबंधित अधिकारी-कर्मचारी मूल पदस्थापना पर लौटे या नहीं और उपस्थिति के आधार पर वेतन आहरण की व्यवस्था किस तरह लागू की गई।
यदि निर्देशों का प्रभावी पालन होता है, तो मूल स्वास्थ्य संस्थानों में मानव संसाधन की उपलब्धता बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। इससे अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों के कामकाज को मजबूती मिलने की संभावना भी रहेगी।
फिलहाल प्रशासनिक आदेश के बाद सबकी निगाहें सात दिवस की समय-सीमा और प्रस्तुत किए जाने वाले पालन प्रतिवेदन पर हैं। अब देखना होगा कि रीवा स्वास्थ्य विभाग में पदस्थापना एवं अटैचमेंट से संबंधित व्यवस्थाओं में कितना बदलाव आता है और नियमों के अनुरूप कार्रवाई किस स्तर तक सुनिश्चित की जाती है।
