नब्बे प्रतिशत का जाल: 'री-ज्वाइनिंग' के नाम पर नया फरमान, 80 हजार अतिथि शिक्षक बेरोजगारी के कगार पर

नब्बे प्रतिशत का जाल: 'री-ज्वाइनिंग' के नाम पर नया फरमान, 80 हजार अतिथि शिक्षक बेरोजगारी के कगार पर

उमरिया - मध्य प्रदेश सरकार और लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) ने एक बार फिर प्रदेश के लगभग 80 हजार अतिथि शिक्षकों के जख्मों पर नमक छिड़क दिया है। री-ज्वाइनिंग को लेकर जारी किए गए एक नए आदेश ने यह साबित कर दिया है कि व्यवस्था को स्कूलों के लिए समर्पित शिक्षक नहीं, बल्कि बेहद कम वेतन पर काम करने वाला “सस्ता मजदूर” चाहिए।

यह जगजाहिर है कि अतिथि शिक्षकों को न तो मेडिकल लीव (अवकाश) की पात्रता है और न ही महिला अतिथि शिक्षकों को मातृत्व अवकाश की कोई सुविधा मिलती है। इसी चौतरफा शोषण के बीच आए एक नए फरमान ने प्रदेश भर के अतिथि शिक्षकों के भविष्य पर संकट के गहरे बादल मँडरा दिए हैं।

क्या है '90% हाजिरी' का नया फरमान?

लोक शिक्षण संचालनालय के पत्र क्रमांक क्र./अति.शि./2026-27/01, दिनांक 02.07.2026 के अनुसार:

  • अब किसी भी अतिथि शिक्षक को स्कूल में री-ज्वाइनिंग (पुनः नियुक्ति) का मौका तभी मिलेगा, जब फरवरी से अप्रैल 2026 तक उसकी उपस्थिति अनिवार्य रूप से 90 प्रतिशत रही हो।

  • सीधे शब्दों में कहें तो, "फरवरी-अप्रैल में 90% हाजिरी लाओ, तभी दोबारा स्कूल में कदम रखो।" इस एक अकेले तकनीकी पेंच ने सैकड़ों अनुभवी शिक्षकों को सीधे बाहर का रास्ता दिखा दिया है।

मानवीयता से कोसों दूर है यह तुगलकी आदेश

इस आदेश को लेकर अतिथि शिक्षकों में भारी आक्रोश है। पीड़ित शिक्षकों का कहना है:

"अतिथि शिक्षक भी समाज का हिस्सा है। उसके भी सामाजिक दायित्व हैं, उसे भी आपदा, दुर्घटना और बीमारी से जूझना पड़ता है। पहले जिस दिन उपस्थित नहीं रहते थे, उस दिन का वेतन कट जाता था, वह व्यवस्था फिर भी ठीक थी। लेकिन अब इस 90% वाले फरमान ने तो हमें इंसान ही नहीं समझा।"

"अफसरशाही कर रही भाजपा सरकार की छवि खराब करने की साजिश"

आक्रोशित अतिथि शिक्षकों ने इस आदेश को तत्काल प्रभाव से रद्द करने की मांग उठाई है। शिक्षकों का सीधा आरोप है कि:

  • सेवानिवृत्ति (रिटायरमेंट) के दिन गिन रहे लोक शिक्षण के संचालक महोदय का यह आदेश, मध्य प्रदेश के हजारों अतिथि शिक्षकों को बेरोजगार बनाकर भाजपा सरकार की छवि को धूमिल करने की एक गहरी प्रशासनिक साजिश है।

  • भविष्य के लिए भी जाल: बताया जा रहा है कि इस आदेश के समानांतर एक और गाइडलाइन जारी की गई है, जिसमें भविष्य में भी 90% हाजिरी को अनिवार्य किया गया है, जो पूरी तरह से व्यावहारिक नहीं है।

आयुक्त महोदय से पुनर्समीक्षा की गुहार

शिक्षा जगत के जानकारों और पीड़ित शिक्षकों का मानना है कि इस तरह के 'तुगलकी फरमान' से ग्रामीण क्षेत्रों की शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह ठप हो जाएगी। शिक्षकों ने मांग की है कि विभाग के वरिष्ठ आयुक्त महोदय को इस संवेदनशील मामले में हस्तक्षेप करना चाहिए और इस आदेश की पुनर्समीक्षा (Review) कर लोक-कल्याणकारी कदम उठाने चाहिए, जिससे हजारों परिवारों को सड़क पर आने से बचाया जा सके।

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