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| ममता बनर्जी को महाझटका: TMC सांसद काकोली घोष ने सभी सांगठनिक पदों से दिया इस्तीफा |
कोलकाता - पश्चिम बंगाल की राजनीति से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस (TMC) को बुधवार (27 मई) को उस समय एक बहुत बड़ा झटका लगा, जब पार्टी की वरिष्ठ नेता और बारासात से सांसद डॉ. काकोली घोष दस्तीदार ने पार्टी के सभी सांगठनिक पदों से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे दिया। काकोली घोष महिला तृणमूल विंग की अध्यक्ष समेत कई अहम पदों पर थीं। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया है कि वह सांसद और पार्टी की साधारण कार्यकर्ता के रूप में बनी रहेंगी, लेकिन उनका यह कदम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी के भीतर एक बड़ी दरार को उजागर कर रहा है।
इस्तीफे की चिट्ठी में आरजी कर कांड और घोटालों का जिक्र
काकोली घोष ने एक विस्तृत बयान जारी कर पार्टी छोड़ने के पीछे अपनी अंतरात्मा की आवाज और "गहरे मानसिक द्वंद्व" को वजह बताया। उन्होंने सीधे तौर पर तृणमूल शासन के दौरान हुए घोटालों और हालिया विवादों पर पार्टी नेतृत्व को कटघरे में खड़ा किया।
सांसद ने अपने बयान में गंभीर आरोप लगाते हुए कहा:
"पिछले एक दशक में पश्चिम बंगाल और पार्टी से जुड़े कई गंभीर आरोपों ने मेरी अंतरात्मा को झकझोर दिया है। राशन वितरण घोटाला, शिक्षकों की भर्ती में भ्रष्टाचार और विभिन्न प्रशासनिक अनियमितताओं ने आम जनता के मन में गहरा गुस्सा पैदा कर दिया है।"
उन्होंने आगे लिखा, "इसके अलावा, आरजी कर मेडिकल कॉलेज में एक महिला डॉक्टर की अस्वाभाविक मृत्यु और उस घटना से जुड़े सबूतों के साथ छेड़छाड़ के आरोपों ने पूरे समाज को हिलाकर रख दिया है। मैंने व्यक्तिगत रूप से इन घटनाओं के नैतिक प्रभाव को बहुत गहराई से महसूस किया है।" उन्होंने चुनाव रणनीतिकार कंपनी आई-पैक (I-PAC) पर भी अपारदर्शी और अलोकतांत्रिक तरीके से संगठन को चलाने का आरोप लगाया।
सचेतक पद से हटाए जाने और शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात के बाद बढ़ा तनाव
यह राजनीतिक घटनाक्रम तब और तेज हो गया जब ममता बनर्जी ने हाल ही में काकोली घोष को टीएमसी संसदीय दल के मुख्य सचेतक (Chief Whip) पद से हटाकर यह जिम्मेदारी वरिष्ठ सांसद कल्याण बनर्जी को सौंप दी थी। इस फैसले से काकोली घोष नाराज चल रही थीं।
सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह रही कि इस इस्तीफे से ठीक एक दिन पहले, मंगलवार को काकोली घोष ने टीएमसी के छह अन्य विधायकों (अनिसुर रहमान विश्वास, बीना मंडल, मोहम्मद अब्दुल मतीन और बशीरहाट के तीन अन्य विधायक) के साथ कल्याणी में भाजपा नेता और विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी की एक प्रशासनिक समीक्षा बैठक में हिस्सा लिया था। टीएमसी सांसदों और विधायकों का शुभेंदु अधिकारी की बैठक में जाना इस बात का साफ संकेत है कि बंगाल टीएमसी में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है और आने वाले दिनों में वहां बड़ा सियासी उलटफेर देखने को मिल सकता है।
