![]() |
| रीवा में इलाज के अभाव में बिस्तर पर जिंदगी की जंग लड़ रही किडनी पीड़िता, विधायक पर जातिगत टिप्पणी का आरोप |
रीवा - मध्य प्रदेश के रीवा जिले से एक बेहद हैरान करने वाला और मानवीय संवेदनाओं को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। यहाँ मनगवां विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत गढ़ (थाना व तहसील गढ़, जिला रीवा) के एक निर्धन परिवार की महिला पिछले एक वर्ष से गंभीर किडनी की बीमारी से पीड़ित है। आर्थिक तंगी और जनप्रतिनिधियों की कथित उदासीनता के कारण पीड़िता आज बिस्तर पर जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष कर रही है।
रीवा से नागपुर तक का सफर, पर पैसों के अभाव में इलाज थमा
पीड़िता के पति ने रोते हुए अपनी आपबीती सुनाई। उन्होंने बताया कि लगभग एक साल पहले उनकी पत्नी की दोनों किडनियाँ खराब हो गई थीं। उन्होंने अपनी क्षमता के अनुसार रीवा, भोपाल और यहाँ तक कि नागपुर के बड़े अस्पतालों में भी पत्नी का इलाज कराया। लेकिन अब घर का सारा पैसा खत्म हो चुका है और आर्थिक तंगी के कारण आगे का इलाज पूरी तरह ठप हो गया है। पीड़िता अब असहाय स्थिति में सिर्फ ईश्वर और किसी सरकारी मदद के भरोसे दिन काट रही है।
विधायक नरेंद्र प्रजापति पर गंभीर आरोप: "जमीन बेच दो या पांच घरों से मांग लो"
पीड़ित परिवार का आरोप है कि उन्होंने मदद की आस में क्षेत्रीय भाजपा विधायक नरेंद्र प्रजापति से फोन पर संपर्क किया था। शुरुआत में विधायक द्वारा आश्वासन दिया गया कि वे शासन स्तर से हरसंभव मदद करेंगे। लेकिन जब पीड़ित पति मदद की गुहार लेकर व्यक्तिगत रूप से विधायक के पास पहुँचा, तो वहाँ उन्हें सहयोग के बजाय घोर संवेदनहीनता और जातिगत टिप्पणी का सामना करना पड़ा।
पीड़ित पति के अनुसार: - "जब मैं विधायक जी के पास गया, तो उन्होंने मदद करने के बजाय मुझसे कहा कि 'तुम ब्राह्मण हो, पाँच घरों से माँग लो या अपनी जमीन बेच दो, हमारे पास कुछ नहीं है।'
जनता में भारी आक्रोश: क्या यही है भाजपा की जनहितैषी भाषा?
इस घटना के बाद से स्थानीय स्तर पर और विशेषकर प्रबुद्ध वर्ग में भारी आक्रोश व्याप्त है। लोगों का कहना है कि रीवा संभाग में विंध्य के कद्दावर नेता और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष स्वर्गीय पंडित श्रीनिवास तिवारी की एक गौरवशाली विरासत रही है, जहाँ दलगत राजनीति से ऊपर उठकर हर जरूरतमंद की मदद की जाती थी। ब्राह्मण समाज सहित क्षेत्र के मतदाताओं ने पंडित श्रीनिवास तिवारी के प्रति सहानुभूति और क्षेत्र के विकास की आस में नरेंद्र प्रजापति को समर्थन दिया था।
अब जनता सीधे भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से यह सवाल पूछ रही है कि:
क्या किसी जनप्रतिनिधि की यह भाषा जनहितैषी कही जा सकती है?
क्या सत्ता के नशे में चूर होकर किसी लाचार मरीज के परिवार का इस तरह जाति के आधार पर उपहास उड़ाना उचित है?
रीवा से ब्राह्मण कोटे या बड़े पदों पर बैठे अन्य नेता इस गंभीर मामले पर चुप क्यों हैं?
इस असंवेदनशील रवैये ने न सिर्फ पीड़ित परिवार की उम्मीदों को तोड़ा है, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों और जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही पर भी एक बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है। पीड़ित परिवार ने शासन-प्रशासन और मुख्यमंत्री से तत्काल इस मामले में संज्ञान लेने और महिला के इलाज के लिए उचित सहायता प्रदान करने की मांग की है।
