| सुकमा; नक्सल प्रभावित इलाकों में शिक्षा पर सख्ती: जगरगुंडा से चिंतागुफा तक स्कूलों पर डीईओ का औचक छापा” |
सुकमा - जिले के अतिसंवेदनशील और कभी नक्सल प्रभावित रहे जगरगुंडा क्षेत्र में शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) श्री जीआर मंडावी ने बड़ा और सख्त कदम उठाया है। उन्होंने जगरगुंडा, चिंतलनार और चिंतागुफा क्षेत्र के स्कूलों, छात्रावासों और पोटा केबिनों का अचानक निरीक्षण कर व्यवस्थाओं की जमीनी हकीकत देखी। निरीक्षण के दौरान कई स्थानों पर लापरवाही सामने आई, जिससे शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया। पोटा केबिन और आरएमएसए छात्रावास में अधीक्षक और अनुदेशकों की अनुपस्थिति पर डीईओ ने नाराजगी जताई और संबंधित कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए।
जिला शिक्षा अधिकारी ने स्पष्ट कहा कि दूरस्थ और संवेदनशील क्षेत्रों में शिक्षा व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने मौजूद स्टाफ को नियमित उपस्थिति और जिम्मेदारी के साथ कार्य करने की चेतावनी दी। हायर सेकेंडरी स्कूल जगरगुंडा में निरीक्षण के दौरान लैब और निर्माणाधीन पुस्तकालय की स्थिति का भी जायजा लिया गया। डीईओ ने निर्देश दिए कि निर्माण कार्यों में गुणवत्ता से कोई समझौता न किया जाए और कार्य समयसीमा के भीतर पूरा किया जाए, ताकि छात्रों को बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं मिल सकें।
इसके साथ ही हाई स्कूल पोलमपल्ली के निर्माण कार्य का भी निरीक्षण किया गया, जहां अधिकारियों को स्पष्ट रूप से गुणवत्ता और निगरानी पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए। इस पूरे दौरे के दौरान सहायक कार्यक्रम समन्वयक श्री आशीष राम और खंड स्रोत समन्वयक कोंटा श्री वीरभद्र राव भी मौजूद रहे। प्रशासन का मानना है कि ऐसे औचक निरीक्षणों से न केवल लापरवाही पर अंकुश लगेगा, बल्कि दूरस्थ इलाकों में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में भी तेजी आएगी।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- जब स्कूल और हॉस्टलों में स्टाफ अनुपस्थित मिला, तो क्या यह एक दिन की लापरवाही है या लंबे समय से चल रही गंभीर निगरानी विफलता का संकेत है?
- पोटा केबिन और छात्रावासों में बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए विभाग की नियमित मॉनिटरिंग व्यवस्था कितनी प्रभावी है?
- क्या औचक निरीक्षण के बाद सिर्फ नोटिस जारी करना पर्याप्त है, या लगातार अनुपस्थित रहने वाले कर्मचारियों पर सख्त निलंबन और सेवा समाप्ति जैसी कार्रवाई भी होगी?