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| गरियाबंद; औचक निरीक्षण का डर या सुशासन की तैयारी? कलेक्टर की सख्ती से अधिकारियों में बढ़ी हलचल Aajtak24 News |
गरियाबंद - जिला कार्यालय सभाकक्ष में कलेक्टर श्री बी.एस. उइके की अध्यक्षता में सुशासन तिहार की तैयारियों को लेकर एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में पुलिस अधीक्षक श्री नीरज चंद्राकर और जिला पंचायत सीईओ श्री प्रखर चंद्राकर सहित सभी विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।
“अचानक आ सकते हैं मुख्यमंत्री या मंत्री”—तैयारी पर जोर
कलेक्टर ने बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए कि सुशासन तिहार के दौरान जिले में कभी भी मुख्यमंत्री, मंत्रीगण या राज्य स्तर के वरिष्ठ अधिकारियों का औचक निरीक्षण हो सकता है। ऐसे में सभी विभागों को पहले से पूरी तरह तैयार रहने के निर्देश दिए गए।
उन्होंने कहा कि अधिकारियों को अपने-अपने विभाग की योजनाओं, प्रगति रिपोर्ट और जमीनी क्रियान्वयन की पूरी जानकारी अपडेट रखनी होगी, क्योंकि निरीक्षण के दौरान सीधे सवाल-जवाब भी हो सकते हैं।
ऑनलाइन एंट्री और पारदर्शिता पर विशेष फोकस
कलेक्टर ने सभी विभागों को निर्देशित किया कि—
- शिविरों में प्राप्त सभी आवेदन अनिवार्य रूप से ऑनलाइन दर्ज किए जाएं
- शिकायतों का त्वरित और समयबद्ध निराकरण किया जाए
- समाधान की जानकारी सीधे आवेदकों तक पहुंचाई जाए
उन्होंने कहा कि सुशासन तिहार का मूल उद्देश्य केवल शिविर लगाना नहीं, बल्कि जनसमस्याओं का वास्तविक समाधान सुनिश्चित करना है।
साफ-सफाई और व्यवस्था पर सख्त निर्देश
बैठक में कलेक्टर ने यह भी कहा कि सभी शिविर स्थल और संबंधित कार्यालय—
- साफ-सुथरे और व्यवस्थित हों
- नागरिकों के लिए सुविधाजनक माहौल हो
- और किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए
प्रशासनिक संदेश: “जवाबदेही तय होगी”
बैठक का मुख्य संदेश यह रहा कि अब योजनाओं की प्रगति केवल कागजों पर नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर दिखाई देनी चाहिए। अधिकारियों को साफ संकेत दिया गया कि सुशासन तिहार के दौरान किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
- क्या औचक निरीक्षण की चेतावनी से वास्तव में कामकाज की गुणवत्ता सुधरेगी या यह केवल प्रशासनिक दबाव बनाने का तरीका है?
- ऑनलाइन एंट्री और त्वरित निराकरण की व्यवस्था क्या जमीनी स्तर पर तकनीकी संसाधनों और स्टाफ की कमी के बावजूद प्रभावी रूप से लागू हो पाएगी?
- क्या सुशासन तिहार केवल निरीक्षण और बैठकों तक सीमित रहेगा या शिकायतों के स्थायी समाधान की कोई दीर्घकालिक व्यवस्था भी तैयार की गई है?
