बालाघाट में कलेक्टर का सख्त संदेश—लंबित राजस्व प्रकरण अब नहीं रुकेंगे Aajtak24 News

बालाघाट में कलेक्टर का सख्त संदेश—लंबित राजस्व प्रकरण अब नहीं रुकेंगे Aajtak24 News

बालाघाट - जिले में लंबित राजस्व प्रकरणों के निराकरण और प्रशासनिक कार्यों में तेजी लाने के उद्देश्य से कलेक्टर मृणाल मीना ने राजस्व अधिकारियों की समीक्षा बैठक आयोजित की। बैठक में विभिन्न राजस्व कार्यों की प्रगति की विस्तार से समीक्षा की गई और अधिकारियों को तय समय सीमा के भीतर परिणाम देने के निर्देश दिए गए। बैठक में अपर कलेक्टर, संयुक्त कलेक्टर, डिप्टी कलेक्टर और एसडीएम स्तर के अधिकारी उपस्थित रहे, जबकि जिले के अन्य एसडीएम और तहसीलदार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े।

फार्मर रजिस्ट्री में धीमी गति पर नाराजगी

बैठक के दौरान फार्मर रजिस्ट्री कार्यों की समीक्षा में कुछ तहसीलों की प्रगति अपेक्षा से कम पाई गई। इस पर कलेक्टर ने असंतोष जताते हुए निर्देश दिए कि विशेष शिविर आयोजित कर शेष किसानों का पंजीयन जल्द पूरा किया जाए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि कोई भी पात्र किसान रजिस्ट्री प्रक्रिया से बाहर नहीं रहना चाहिए और इस कार्य को प्राथमिकता के साथ पूरा किया जाए।

नक्शा तरमीम और राजस्व रिकॉर्ड अपडेट करने पर जोर

समीक्षा के दौरान नक्शा तरमीम कार्य में कुछ क्षेत्रों की प्रगति धीमी पाए जाने पर अधिकारियों को नियमित निगरानी और कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए गए।

कलेक्टर ने कहा कि राजस्व अभिलेखों का अद्यतन और शुद्ध होना प्रशासनिक व्यवस्था की मूल आवश्यकता है और इसमें लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

नामांतरण, सीमांकन और बंटवारे के मामलों पर फोकस

बैठक में नामांतरण, सीमांकन, बंटवारा और राजस्व वसूली से जुड़े मामलों की भी गहन समीक्षा की गई।

निर्देश दिए गए कि सभी राजस्व प्रकरण अनिवार्य रूप से आरसीएमएस पोर्टल पर दर्ज किए जाएं तथा अविवादित मामलों का समय सीमा के भीतर निराकरण सुनिश्चित किया जाए।

सीएम हेल्पलाइन शिकायतों पर भी सख्ती

समीक्षा के दौरान लंबित शिकायतों को लेकर भी अधिकारियों को निर्देश दिए गए। विशेष रूप से लंबे समय से लंबित शिकायतों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाने पर जोर दिया गया ताकि नागरिकों को अनावश्यक प्रतीक्षा न करनी पड़े।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

1. यदि राजस्व प्रकरणों के लिए पहले से समयसीमा तय है, तो बड़ी संख्या में मामले लंबित क्यों हैं और अब तक जिम्मेदारी किस स्तर पर तय हुई?

2. फार्मर रजिस्ट्री की धीमी प्रगति पर नाराजगी जताई गई—क्या प्रशासन उन किसानों का जिला स्तर पर डेटा सार्वजनिक करेगा जो अब भी पंजीयन से बाहर हैं?

3. आरसीएमएस पोर्टल पर सभी प्रकरण दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं, लेकिन क्या जिले में पोर्टल आधारित निस्तारण की गुणवत्ता और समयसीमा का स्वतंत्र ऑडिट भी होगा?

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