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| मंडला; टीबी के खिलाफ अब आयुष की एंट्री: 100 दिन के मिशन पर स्वास्थ्य विभाग का बड़ा प्लान Aajtak24 News |
मंडला - टीबी मुक्त भारत अभियान को जमीनी स्तर पर मजबूत बनाने के लिए मंडला जिले में आयुष विभाग द्वारा एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला का उद्देश्य केवल स्वास्थ्य विभाग तक सीमित न रहकर आयुष संस्थानों और विभिन्न विभागों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना था, ताकि टीबी उन्मूलन अभियान को व्यापक जनसहभागिता के साथ आगे बढ़ाया जा सके। कार्यक्रम में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डी.जे. मोहंती तथा जिला क्षय नियंत्रण अधिकारियों ने भारत सरकार के “टीबी मुक्त भारत अभियान – 100 दिवस अभियान” की जानकारी साझा की और अभियान की प्राथमिकताओं पर विस्तार से चर्चा की।
टीबी के खिलाफ बहुस्तरीय रणनीति पर जोर
कार्यशाला में बताया गया कि स्वास्थ्य विभाग और आयुष विभाग मिलकर जागरूकता, पहचान और सहयोग आधारित मॉडल पर काम करेंगे। इसके तहत स्वास्थ्य गतिविधियों के साथ समुदाय तक पहुंच बढ़ाने की योजना बनाई गई। अधिकारियों ने कहा कि टीबी नियंत्रण केवल इलाज तक सीमित नहीं है, बल्कि समय पर पहचान, जागरूकता और सामाजिक सहयोग भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
स्क्रीनिंग, जागरूकता और सोशल मीडिया अभियान पर फोकस
बैठक में जिन प्रमुख गतिविधियों पर चर्चा हुई उनमें आईईसी सामग्री के माध्यम से जागरूकता, आयुष्मान आरोग्य शिविरों में स्क्रीनिंग कैंप, सोशल मीडिया के जरिए एंटी-टीबी संदेशों का प्रसार, निक्षय शपथ और निक्षय मित्र पंजीयन शामिल रहे। इसके साथ समुदाय आधारित भागीदारी बढ़ाने और स्वास्थ्य संस्थानों को अभियान से सक्रिय रूप से जोड़ने पर भी जोर दिया गया।
वेलनेस मॉडल को भी जोड़ा जाएगा
कार्यशाला में आयुष आधारित वेलनेस, योग और आयुर्वेदिक जीवनशैली को टीबी देखभाल के सहयोगी दृष्टिकोण के रूप में शामिल करने पर चर्चा की गई। हालांकि टीबी के उपचार के लिए निर्धारित चिकित्सकीय उपचार और राष्ट्रीय कार्यक्रम के प्रोटोकॉल का पालन प्राथमिक आधार रहेगा। कार्यशाला में जिला आयुष अधिकारी गायत्री आहाके सहित कई चिकित्सा अधिकारी उपस्थित रहे।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
1. 100 दिवस अभियान की समीक्षा किस आधार पर होगी—टीबी मरीजों की पहचान, इलाज की सफलता दर या नए मामलों में कमी?
2. आयुष आधारित वेलनेस को अभियान से जोड़ा जा रहा है, लेकिन क्या इसके प्रभाव को मापने के लिए कोई वैज्ञानिक मूल्यांकन तंत्र भी तैयार किया गया है?
3. निक्षय मित्र और जागरूकता गतिविधियों की चर्चा हुई, लेकिन पिछले अभियानों में पंजीकृत सहयोगियों और वास्तविक लाभार्थियों का जिला स्तर पर क्या परिणाम रहा?
