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| हरदा; हर अफसर बना ‘पोषण प्रहरी’: हरदा में कुपोषण के खिलाफ शुरू हुआ जिम्मेदारी वाला मॉडल Aajtak24 News |
हरदा - कुपोषण के खिलाफ प्रशासनिक निगरानी और सामाजिक भागीदारी को जोड़ते हुए हरदा जिले में एक अभिनव पहल शुरू की गई है। “पोषण प्रहरी” नाम से संचालित इस अभियान का उद्देश्य गंभीर कुपोषित और कुपोषित बच्चों को नियमित निगरानी, पोषण सहायता और सामुदायिक सहयोग के माध्यम से सामान्य पोषण स्तर तक पहुंचाना है। कलेक्टर सिद्धार्थ जैन के मार्गदर्शन में संचालित इस अभियान को जिले में कुपोषण मुक्ति की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक पहल बताया जा रहा है। अभियान के संचालन में महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी राजा रंगारे की मॉनिटरिंग और समन्वय की भूमिका प्रमुख बताई गई है।
अभियान के तहत गंभीर कुपोषित और मध्यम कुपोषित बच्चों की पहचान कर उन्हें पोषण सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। विशेष व्यवस्था के तहत प्रत्येक जिला अधिकारी को दो-दो बच्चों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी दी गई है, ताकि बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण स्तर में निरंतर सुधार सुनिश्चित किया जा सके। “पोषण प्रहरी” के अंतर्गत बच्चों को पोषण तत्वों से युक्त न्यूट्रिशन किट उपलब्ध कराई जा रही है। इन किटों में प्रोटीन, आयरन, कैल्शियम और अन्य आवश्यक पोषक तत्व शामिल किए गए हैं। प्रशासन का कहना है कि सहायता तब तक जारी रखी जाएगी जब तक बच्चा कुपोषण की श्रेणी से बाहर नहीं आ जाता।
जिला प्रशासन के अनुसार अभियान के तहत कुल 613 कुपोषित एवं अतिकुपोषित बच्चों की पहचान की गई है, जिनमें से लगभग 200 बच्चों को कुपोषण से बाहर लाने का दावा किया गया है। अभियान के दूसरे चरण में प्रशासनिक अधिकारियों के साथ जनप्रतिनिधियों और समाज के प्रबुद्ध नागरिकों को भी जोड़ा गया है ताकि पोषण, जागरूकता और बच्चों की देखभाल को सामुदायिक स्वरूप दिया जा सके।
प्रशासन का कहना है कि महिला एवं बाल विकास विभाग, स्वास्थ्य विभाग और अन्य संबंधित विभागों के समन्वय से स्वास्थ्य जांच, वजन निगरानी और पोषण परामर्श जैसी गतिविधियां लगातार संचालित की जा रही हैं। इस पहल को सुशासन और सामाजिक सहभागिता के मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
1. 200 बच्चों को कुपोषण से बाहर लाने का दावा किया गया है—क्या इसके लिए कोई स्वतंत्र सत्यापन या सार्वजनिक डेटा उपलब्ध कराया जाएगा?
2. जिन बच्चों को न्यूट्रिशन किट दी जा रही है, उनके परिवारों की सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों पर भी समानांतर काम किया जा रहा है या नहीं?
3. यदि हर अधिकारी को दो बच्चों की जिम्मेदारी दी गई है, तो क्या अभियान की सफलता या असफलता के लिए उनकी जवाबदेही तय करने का कोई स्पष्ट तंत्र भी बनाया गया है?
