सुकमा; चौपाल में बैठे अफसर, जंगल में चली सरकार: वनांचलों में बदली तस्वीर या बन रहा नया मॉडल? Aajtak24 News

सुकमा; चौपाल में बैठे अफसर, जंगल में चली सरकार: वनांचलों में बदली तस्वीर या बन रहा नया मॉडल? Aajtak24 News

सुकमा - जहां कभी सरकारी दफ्तर और गांवों के बीच दूरी केवल किलोमीटर में नहीं बल्कि भरोसे में भी मापी जाती थी, वहां अब प्रशासन खुद गांवों की चौपाल तक पहुंचने का दावा कर रहा है। सुकमा जिले के सुदूर वनांचलों में इन दिनों ‘सुशासन तिहार’, ‘जनजातीय गरिमा उत्सव’ और ‘जनभागीदारी अभियान’ के जरिए प्रशासन और ग्रामीणों के बीच संवाद का नया मॉडल प्रस्तुत करने की कोशिश दिखाई दे रही है। छिंदगढ़, सुकमा और कोंटा विकासखंड के गांवों में आयोजित इन कार्यक्रमों का उद्देश्य जनजातीय समुदायों को योजनाओं से जोड़ना और अंतिम व्यक्ति तक सरकारी सेवाएं पहुंचाने का बताया गया। प्रशासन का दावा है कि इससे उन इलाकों तक पहुंच मजबूत हो रही है जो लंबे समय से विकास की मुख्यधारा से दूर रहे हैं।

इस अभियान की सबसे चर्चित तस्वीर तब सामने आई जब कलेक्टर अमित कुमार और जिला पंचायत सीईओ मुकुन्द ठाकुर छिंदगढ़ विकासखंड के सुर्रेपाल, जांगड़पाल और मुड़वाल गांव पहुंचे। औपचारिक मंचों से अलग दोनों अधिकारियों ने ग्रामीणों के बीच जमीन पर बैठकर चौपाल की और सीधे लोगों की समस्याएं सुनीं। ग्रामीणों ने पानी, दस्तावेज, योजनाओं के लाभ और स्थानीय जरूरतों से जुड़े मुद्दे सामने रखे। मौके पर मौजूद अधिकारियों को कई मामलों में तत्काल निर्देश भी दिए गए। प्रशासन का मानना है कि इससे शिकायतों के निराकरण की प्रक्रिया तेज होगी।

लेकिन इस पूरे अभियान की सबसे अलग पहल रही—‘ट्रांसेक्ट वॉक’। प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने गांवों में पैदल भ्रमण कर रास्तों, बस्तियों, संसाधनों और स्थानीय जरूरतों को नजदीक से समझने की कोशिश की। इसका उद्देश्य कागजी रिपोर्टों की बजाय वास्तविक परिस्थितियों के आधार पर निर्णय लेना बताया गया। शिविरों के दौरान ग्रामीणों को कई सेवाएं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कराई गईं। डिजिटल सेवाएं, दस्तावेजों में सुधार, पहचान संबंधी कार्य, स्वास्थ्य परीक्षण और विभिन्न विभागों की जानकारी एक ही स्थान पर देने का प्रयास किया गया।

स्वास्थ्य विभाग की टीम ने बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों की जांच कर दवाइयां वितरित कीं। वहीं कृषि, महिला एवं बाल विकास तथा पंचायती राज विभागों ने जल, जंगल, जमीन, शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी साझा की। हालांकि इस पहल की वास्तविक सफलता अब इस बात से तय होगी कि चौपाल में सुनी गई समस्याएं फाइलों में दर्ज होकर रह जाती हैं या उनके समाधान गांवों तक दिखाई भी देते हैं।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

1. ट्रांसेक्ट वॉक और चौपाल के दौरान ग्रामीणों से प्राप्त कुल शिकायतों और मांगों का क्या रिकॉर्ड तैयार किया गया है, और उनके निराकरण की सार्वजनिक समय-सीमा क्या है?

2. जिन गांवों में प्रशासन पहली बार इस स्तर पर पहुंचा, वहां शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं की वर्तमान स्थिति का कोई बेसलाइन सर्वे कराया गया है या नहीं?

3. सुशासन तिहार और जनजातीय गरिमा उत्सव के बाद प्रशासन यह कैसे मापेगा कि लोगों का भरोसा और योजनाओं की वास्तविक पहुंच बढ़ी है—क्या इसके लिए कोई स्वतंत्र मूल्यांकन तंत्र बनाया गया है?

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