ग्वालियर में पटाखों पर ‘नो-रिस्क’ नीति: अब एक चूक और लाइसेंस खत्म! Aajtak24 News

ग्वालियर में पटाखों पर ‘नो-रिस्क’ नीति: अब एक चूक और लाइसेंस खत्म! Aajtak24 News

ग्वालियर - जिले में आतिशबाजी (पटाखा) निर्माण, भंडारण और बिक्री को लेकर प्रशासन ने बड़ा और सख्त कदम उठाया है। जिले में किसी भी तरह की लापरवाही या अवैध गतिविधियों को रोकने के लिए कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी रुचिका चौहान ने विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। आदेश के बाद प्रशासनिक अमला मैदान में उतर चुका है और निरीक्षण अभियान शुरू कर दिया गया है। राज्य शासन के गृह विभाग के निर्देशों के अनुरूप विस्फोटक अधिनियम और नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के लिए सभी एसडीएम, कार्यपालिक मजिस्ट्रेट, पुलिस अधिकारियों और थाना प्रभारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। साफ संदेश दिया गया है कि अब सुरक्षा नियमों से समझौता नहीं होगा।

हर लाइसेंसधारी पर रहेगी प्रशासन की नजर

प्रशासन ने निर्देश दिए हैं कि सभी अधिकारी अपने क्षेत्र में संचालित लाइसेंसधारी आतिशबाजी इकाइयों की सूची तैयार रखें और हर छह महीने में उनका भौतिक सत्यापन करें। उद्देश्य केवल दस्तावेजी जांच नहीं बल्कि जमीनी स्तर पर सुरक्षा व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति को परखना है। इसके तहत प्रत्येक फैक्ट्री, गोदाम और बिक्री केंद्र का निरीक्षण कर रिपोर्ट जिला कार्यालय को भेजी जाएगी।

गिरवाई क्षेत्र में अचानक पहुंची प्रशासनिक टीम

कलेक्टर के निर्देश के बाद कार्रवाई की शुरुआत हो चुकी है। शुक्रवार को एसडीएम लश्कर नरेन्द्र बाबू यादव ने टीम के साथ गिरवाई क्षेत्र की पटाखा फैक्ट्रियों और गोदामों का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान भंडारण स्थलों, विनिर्माण इकाइयों और सुरक्षा व्यवस्था का परीक्षण किया गया। संचालकों को स्पष्ट चेतावनी दी गई कि नियमों की अनदेखी पर केवल जुर्माना ही नहीं बल्कि लाइसेंस निरस्तीकरण जैसी कार्रवाई भी हो सकती है।

फैक्ट्रियों के लिए सुरक्षा मानकों की नई सख्ती

नई गाइडलाइन के अनुसार विनिर्माण इकाइयों में शेडों के बीच निर्धारित दूरी बनाए रखना अनिवार्य होगा। कमरों का आकार सीमित रहेगा, प्रत्येक इकाई में सुरक्षा दीवारें बनाई जाएंगी और विस्फोटक सामग्री की अधिकतम सीमा तय की गई है। इसके साथ रिकॉर्ड प्रबंधन को भी अनिवार्य बनाया गया है ताकि किसी भी समय स्टॉक की जांच की जा सके।

दुकानों के लिए भी सख्त नियम

आतिशबाजी दुकानों को लेकर भी प्रशासन ने स्पष्ट व्यवस्था बनाई है। आबादी वाले क्षेत्रों में भंडारण और बिक्री पर रोक, दुकानों के बीच न्यूनतम दूरी, सुरक्षित विद्युत व्यवस्था और आग से बचाव के विशेष प्रावधान लागू किए गए हैं। एक बाजार या समूह में सीमित संख्या में ही पटाखा दुकानें लगाने की अनुमति होगी ताकि किसी आपात स्थिति में नुकसान को नियंत्रित किया जा सके।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

1. जिले में पिछले पांच वर्षों में कितनी पटाखा फैक्ट्रियों और दुकानों के लाइसेंस सुरक्षा उल्लंघन के कारण निलंबित या निरस्त किए गए, और कार्रवाई का परिणाम क्या रहा?

2. हर छह महीने में भौतिक सत्यापन की व्यवस्था घोषित हुई है, लेकिन क्या निरीक्षण रिपोर्ट सार्वजनिक पोर्टल पर अपलोड कर पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी?

3. प्रशासन ने सुरक्षा मानकों को सख्त किया है, लेकिन क्या जिले में आपदा की स्थिति में पटाखा फैक्ट्रियों के लिए अलग आपातकालीन प्रतिक्रिया (Emergency Response Plan) और मॉक ड्रिल की व्यवस्था भी बनाई गई है?

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