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| रीवा; भीषण गर्मी में बंद मिल रहे रीवा-मऊगंज के ग्रामीण दफ्तर, बैठकों के नाम पर लटक रहे ताले Aajtak24 News |
रीवा/मऊगंज - विंध्य क्षेत्र में इस समय सूरज की तपिश और भीषण गर्मी से आम जनजीवन पूरी तरह बेहाल है। पारा लगातार रिकॉर्ड तोड़ रहा है, लेकिन इस जानलेवा गर्मी के बीच रीवा और मऊगंज जिले के ग्रामीण अंचलों के सरकारी कार्यालयों और तहसीलों की बदइंतजमी ने आम जनता, पक्षकारों और वकीलों की मुश्किलों को दोगुना कर दिया है। क्षेत्र की पीड़ित जनता और अधिवक्ताओं ने समाचार पत्र के माध्यम से दोनों जिलों के कलेक्टर का ध्यान इस गंभीर समस्या की ओर आकर्षित कराते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की है।
बैठकों के नाम पर लटकते हैं ताले, सुबह से शाम तक भटक रहे लोग
स्थानीय ग्रामीणों और अधिवक्ताओं का सीधा आरोप है कि रीवा और मऊगंज जिले की अधिकांश ग्रामीण तहसीलों और शासकीय कार्यालयों में आए दिन 'बैठक और वीसी (वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग)' के नाम पर ताले लटके रहते हैं। दूर-दराज के गांवों से अपने जरूरी राजस्व, जमीन और अदालती कामों के लिए आने वाले गरीब पक्षकार और वकील इस भीषण गर्मी और लू के थपेड़ों के बीच सुबह 10:00 बजे से लेकर शाम 5:00 बजे तक बंद दफ्तरों के सामने बैठने को मजबूर हैं। अधिकारियों के न मिलने से उनके समय और पैसे दोनों की बर्बादी हो रही है।
पूर्व सूचना बोर्ड पर चस्पा करने और समय बदलने की मांग
परेशान जनता ने जिला कलेक्टर से मांग की है कि यदि अधिकारी किसी आवश्यक विभागीय बैठक या समीक्षा मीटिंग में व्यस्त रहते हैं, तो इसकी पूर्व सूचना कार्यालय के नोटिस बोर्ड पर अनिवार्य रूप से चस्पा की जानी चाहिए। इसके साथ ही, बैठकों या संभावित प्रशासनिक व्यस्तता की जानकारी एक दिन पहले ही स्थानीय समाचार पत्रों और अन्य सार्वजनिक माध्यमों से जारी की जाए, ताकि भीषण लू में पक्षकारों और वकीलों को बेवजह न्यायालय परिसर या दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें। प्रबुद्ध नागरिकों का कहना है कि या तो इस जानलेवा गर्मी को देखते हुए ग्रामीण तहसीलों में कुछ समय के लिए अवकाश घोषित किया जाए, या फिर कार्यालय खुलने का समय सुबह का (मॉर्निंग कोर्ट की तर्ज पर) किया जाए।
पीने के पानी का संकट, पर 'तारीख-पेशी' की मजबूरी
ग्रामीण अंचलों के इन शासकीय परिसरों में सबसे बदतर स्थिति पेयजल व्यवस्था की है। अधिकांश दफ्तरों और न्यायालय परिसरों में इस भीषण नौतपा और गर्मी के बावजूद पीने के साफ और ठंडे पानी तक का इंतजाम नहीं है।
पीड़ित पक्षकारों का दर्द: "मुकदमों की पैरवी करना हमारी कानूनी मजबूरी है। तारीख-पेशी न छूट जाए और कोई एकतरफा आदेश न हो जाए, इस डर से चाहे इस जानलेवा गर्मी में जान ही क्यों न चली जाए, हमें न्यायालय की चौखट पर आना ही पड़ता है। लेकिन यहाँ आने पर सिवाय बंद कमरों और लटके तालों के कुछ हासिल नहीं होता।"
कलेक्टर्स से औचक निरीक्षण और कड़े कदम उठाने की अपील
क्षेत्र के अधिवक्ताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने रीवा व मऊगंज जिला कलेक्टर से पुरजोर अपील की है कि ग्रामीण अंचलों के इन लापरवाह दफ्तरों का औचक निरीक्षण (Surprise Inspection) कराया जाए। समय पर कार्यालय खोलने, बैठकों की पारदर्शिता बनाए रखने और परिसर में तत्काल छांव व शीतल जल की व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए कड़े दिशा-निर्देश जारी किए जाएं, ताकि बेबस और गरीब जनता को इस भीषण तपिश में और प्रताड़ित न होना पड़े।
