रीवा में प्रशासनिक कसावट से हड़कंप: कलेक्टर और एसपी की 'जुगलबंदी' ने बदली जिले की तस्वीर, माफिया पस्त! Aajtak24 News

रीवा में प्रशासनिक कसावट से हड़कंप: कलेक्टर और एसपी की 'जुगलबंदी' ने बदली जिले की तस्वीर, माफिया पस्त! Aajtak24 News

रीवा - विंध्य क्षेत्र के सबसे मुख्य और संवेदनशील रीवा जिले में इन दिनों प्रशासनिक और पुलिस महकमे की जबरदस्त सख्ती का असर अब साफ दिखाई देने लगा है। जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक (SP) की सक्रियता और सख्त कार्यशैली ने जहां एक ओर भ्रष्टाचार और अवैध धंधे करने वालों की नींद उड़ा दी है, वहीं दूसरी ओर बरसों बाद आम जनता के बीच शासन-प्रशासन के प्रति विश्वास की एक नई और सकारात्मक लहर पैदा हुई है।

अवैध गतिविधियों पर कड़ा प्रहार, थम गया 'अवैध वसूली' का खेल

हाल ही के दिनों में रीवा जिले सहित पूरे संभाग में अवैध शराब (पाइकारी) के ठिकानों पर ताबड़तोड़ की गई छापामार कार्रवाई और अवैध पशु परिवहन (गौ-तस्करी) के खिलाफ उठाए गए कड़े कदमों ने अपराधियों के हौसले पूरी तरह पस्त कर दिए हैं। प्रशासनिक गलियारों में चर्चा है कि पूर्व में आबकारी, राजस्व, पुलिस, पंचायत, सहकारिता और महिला बाल विकास जैसे महत्वपूर्ण विभागों में कमियां उजागर करने और दबाव बनाने के नाम पर जो 'अवैध वसूली' का खेल पर्दे के पीछे चलता था, उस पर अब मौजूदा आला अधिकारियों की कड़ाई के कारण पूरी तरह अंकुश लग चुका है।

ब्लैकमेलिंग के सिंडिकेट पर चोट, सहमे तथाकथित बिचौलिए

जिले में प्रशासनिक कसावट का आलम यह है कि अब 'सेवा शुल्क' या 'सेटमेंट' के नाम पर जमीनी कर्मचारियों को डराने वाले तथाकथित समाजसेवियों, कुछ रसूखदार आरटीआई कार्यकर्ताओं और कथित पत्रकारों के बीच हड़कंप मचा हुआ है। पूर्व में पटवारी, तहसीलदार, थाना प्रभारी और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं जैसे मैदानी अमले से कमियां ढूंढकर जो अवैध धन उगाही की जाती थी, वह कप्तानों की इस नई व्यवस्था में पूरी तरह बंद हो गई है। ईमानदारी से काम करने वाले सरकारी कर्मचारियों ने भी राहत की सांस ली है।

ग्रामीण अंचलों में प्रशंसा, लेकिन चुनौतियां अभी भी बरकरार

रीवा के ग्रामीण अंचलों में जिला कलेक्टर और पुलिस कप्तान की इस बेदाग और सख्त कार्यशैली की जमकर सराहना हो रही है। आम नागरिकों के मन में यह भरोसा जागा है कि अब बिना किसी राजनीतिक दबाव, बिचौलियों या रिश्वत के उनके जायज काम दफ्तरों में आसानी से हो रहे हैं। हालांकि, राजनैतिक जानकारों और समीक्षकों का मानना है कि दोनों शीर्ष अधिकारियों के सामने भविष्य में जनता की इन उच्च अपेक्षाओं पर लगातार खरा उतरना और इस कड़े सिस्टम को इसी तरह बिना किसी दबाव के चुस्त-दुरुस्त बनाए रखना एक बड़ी चुनौती होगी।

रीवा जिले में वर्तमान प्रशासनिक कड़ाई ने पूरे विंध्य में एक नई नजीर पेश की है। अब देखना यह होगा कि आने वाले समय में यह व्यवस्था धरातल पर कितनी और सुदृढ़ होती है, लेकिन फिलहाल कलेक्टर-एसपी की यह 'प्रशासनिक कसावट' जिले के हर चौराहे और सरकारी महकमों में चर्चा का मुख्य विषय बनी हुई है।

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