| रीवा; “कृषक कल्याण वर्ष” 2026: गंगेव के गांवों में पहुंचा कृषि रथ, वैज्ञानिकों ने दी प्राकृतिक मूंग और ई-टोकन व्यवस्था की जानकारी Aajtak24 News |
रीवा/गंगेव - मध्य प्रदेश सरकार द्वारा घोषित “कृषक कल्याण वर्ष” 2026 के अंतर्गत जिले में कृषि तकनीकों के प्रचार-प्रसार के लिए विशेष कृषि रथ अभियान चलाया जा रहा है। इसी कड़ी में 21 मई 2026 को विकासखंड गंगेव की ग्राम पंचायत देवहटा, हीरुडीह और मड़फा में कृषि रथ का भव्य आयोजन किया गया। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य किसानों और कृषि वैज्ञानिकों के बीच सीधा संवाद स्थापित कर आधुनिक खेती को बढ़ावा देना है। कार्यक्रम में कृषि महाविद्यालय रीवा के कृषि वैज्ञानिक डॉ. सुधांशु पांडे, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी श्री शिव सरण सरल, श्री सुधांशु शुक्ला, कृषि विस्तार अधिकारी बबिता साकेत, और आत्मा परियोजना से दीपक कुमार श्रीवास्तव व स्वीकृति शुक्ला मुख्य रूप से उपस्थित रहे।
तीन चरणों में मिल रही है नवीन तकनीकों की जानकारी
प्रत्येक ग्राम पंचायत स्तर पर तीन चरणों में आयोजित इस कार्यक्रम के माध्यम से किसानों को कृषि, पशुपालन, उद्यानिकी, मत्स्य पालन, डेयरी और कृषि अभियांत्रिकी से जुड़ी योजनाओं की जानकारी दी जा रही है। कृषि वैज्ञानिक डॉ. सुधांशु पांडे ने किसानों को जैविक व प्राकृतिक खेती, मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना, कीट-रोग प्रबंधन, फसल विविधीकरण और पराली प्रबंधन के बारे में विस्तार से समझाया।
पारदर्शी खाद वितरण के लिए 'बलराम ई-विकास एप'
वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी श्री शिव सरण सरल ने छोटे किसानों के लिए 'इंटीग्रेटेड फार्मिंग' (एकीकृत कृषि प्रणाली) को सबसे प्रभावी मॉडल बताया। वहीं, आत्मा परियोजना के दीपक कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि मध्य प्रदेश सरकार ने उर्वरक वितरण व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए बलराम ई-विकास एप के माध्यम से ई-टोकन व्यवस्था शुरू की है। इसके तहत किसान भाई अपने आधार सत्यापित ओटीपी (OTP) से लॉगिन कर अपनी सुविधानुसार फुटकर विक्रेता का चयन करके खाद प्राप्त कर सकते हैं।
प्राकृतिक मूंग और सुंदरजा आम की फसलों का निरीक्षण
भ्रमण के दौरान अधिकारियों और वैज्ञानिकों के दल ने ग्राम गोदरी में प्रगतिशील किसान श्री हरीशंकर पटेल के खेत पर लगी ग्रीष्मकालीन प्राकृतिक मूंग, दशहरी और रीवा के प्रसिद्ध सुंदरजा आम के बगीचे का निरीक्षण किया। साथ ही श्री कृष्ण कुमार शुक्ला के खेत में भी मूंग की फसल देखी गई और किसानों को उन्नत सुझाव देते हुए मिट्टी के नमूने एकत्रित किए गए।