बालाघाट; फाइलों से बाहर आया प्रशासन: परसवाड़ा में कलेक्टर ने पूछा—योजनाएं जमीन पर हैं या सिर्फ रिपोर्ट में? Aajtak24 News

बालाघाट; फाइलों से बाहर आया प्रशासन: परसवाड़ा में कलेक्टर ने पूछा—योजनाएं जमीन पर हैं या सिर्फ रिपोर्ट में? Aajtak24 News

बालाघाट - सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और विभागीय कामकाज की जमीनी समीक्षा के लिए परसवाड़ा में आयोजित खंड स्तरीय समीक्षा बैठक में प्रशासन का सख्त रुख देखने को मिला। बैठक में विभिन्न विभागों के कामकाज, लक्ष्य पूर्ति और योजनाओं के वास्तविक क्रियान्वयन की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि परिणाम आधारित कार्यशैली अपनाई जाए। मृणाल मीना ने सांदीपनि विद्यालय परसवाड़ा में आयोजित बैठक में सभी विभागों को योजनाओं की सतत मॉनिटरिंग और समयबद्ध क्रियान्वयन के निर्देश दिए। बैठक में जिला पंचायत सीईओ अभिषेक सराफ, अपर कलेक्टर डी पी बर्मन तथा एसडीएम श्रीष प्यासी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।

शिक्षा विभाग की समीक्षा में कक्षा 1 से 12 तक शत-प्रतिशत छात्र पंजीयन, साइकिल वितरण, पाठ्यपुस्तक उपलब्धता और कमजोर शैक्षणिक स्तर वाले विद्यालयों में एफएलएन मेले आयोजित करने पर जोर दिया गया। कलेक्टर ने कहा कि सरकारी विद्यालयों के बच्चों की शिक्षा को भी समान गंभीरता से लिया जाए। पशुपालन विभाग को एफएमडी टीकाकरण, कृत्रिम गर्भाधान और कामधेनु योजना में प्रगति लाने के निर्देश दिए गए। श्रम विभाग को संबल योजना, अंत्येष्टि सहायता और श्रमिक पंजीयन में तेजी लाने को कहा गया।

स्वास्थ्य और महिला एवं बाल विकास विभाग की समीक्षा में कर्मचारियों की उपस्थिति सार्थक एप के माध्यम से दर्ज करने तथा उसी आधार पर वेतन प्रक्रिया अपनाने के निर्देश दिए गए। एएनएम, आशा कार्यकर्ताओं और स्वास्थ्य कर्मचारियों को मातृ स्वास्थ्य सेवाओं और गांव भ्रमण को लेकर जवाबदेही तय करने के संकेत भी दिए गए। राजस्व विभाग की समीक्षा में नक्शा तरमीम, फार्मर रजिस्ट्री और नामांतरण मामलों की धीमी प्रगति पर नाराजगी जताई गई। कलेक्टर ने स्पष्ट कहा कि निर्धारित समय में सुधार नहीं होने पर संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई प्रस्तावित की जाएगी।

मनरेगा कार्यों की समीक्षा में रोजगार उपलब्धता, लेबर बजट उपयोग और जॉब कार्ड धारकों को काम देने पर विशेष जोर दिया गया। बैठक में यह भी कहा गया कि परसवाड़ा क्षेत्र के विकास और रोजगार सृजन को प्राथमिकता दी जाए। इसके साथ ही पंचायत स्तर पर विभिन्न विभागीय कर्मचारियों की उपस्थिति और भ्रमण की पारदर्शी जानकारी सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करने के निर्देश भी दिए गए, ताकि आम नागरिकों को सेवा उपलब्धता की जानकारी मिल सके।

आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल

1. जिन विभागों की प्रगति लगातार धीमी पाई जा रही है, क्या उनके खिलाफ पहले भी कार्रवाई हुई थी और उसका परिणाम क्या रहा?

2. बार-बार समीक्षा बैठकों और चेतावनियों के बावजूद योजनाओं के क्रियान्वयन में देरी क्यों बनी रहती है—क्या समस्या संसाधनों की है या जवाबदेही की?

3. पंचायत स्तर पर अधिकारियों के आने-जाने का समय सार्वजनिक करने के निर्देश दिए गए हैं, तो क्या इसकी निगरानी के लिए कोई स्वतंत्र व्यवस्था भी बनाई जाएगी?

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