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| कटनी ने सरकारी स्कूलों में शुरू किया ऐसा प्रयोग, जो बदल सकता है पढ़ाई का पूरा तरीका Aajtak24 News |
कटनी - सरकारी स्कूलों की पढ़ाई को पारंपरिक व्यवस्था से आगे ले जाकर डिजिटल और सहभागितापूर्ण बनाने की दिशा में कटनी जिले ने एक नई पहल शुरू की है। अब विद्यार्थियों की पढ़ाई केवल किताब और ब्लैकबोर्ड तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि मोबाइल और स्मार्ट बोर्ड के जरिए अध्याय सीधे डिजिटल रूप में उपलब्ध होंगे। कलेक्टर आशीष तिवारी के निर्देशन में जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान कटनी द्वारा कक्षा 6 से 8 तक के विद्यार्थियों के लिए क्यूआर कोड आधारित “स्मार्ट स्टडी सिस्टम” विकसित किया गया है। इस मॉडल के तहत विभिन्न विषयों के प्रत्येक अध्याय को डिजिटल सामग्री से जोड़ा गया है ताकि विद्यार्थी स्कैन कर अध्ययन कर सकें।
नई व्यवस्था में हिंदी, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान के अध्यायों के लिए अलग-अलग क्यूआर कोड तैयार किए गए हैं। छात्र जैसे ही मोबाइल या स्मार्ट बोर्ड से कोड स्कैन करेंगे, उनके सामने संबंधित विषय की वीडियो क्लास, सरल व्याख्या और अध्ययन सामग्री उपलब्ध हो जाएगी। इसका उद्देश्य पढ़ाई को अधिक दृश्यात्मक, आसान और समझने योग्य बनाना है। इस पहल की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह भी बताई गई कि जिन विषयों पर गुणवत्तापूर्ण डिजिटल सामग्री उपलब्ध नहीं थी, वहां विशेषज्ञ शिक्षकों द्वारा स्थानीय शैली और सरल उदाहरणों के साथ नए वीडियो तैयार किए गए। इससे ग्रामीण और सामान्य पृष्ठभूमि के विद्यार्थियों को विषय समझने में मदद मिलने की उम्मीद है।
जिले के 45 शासकीय विद्यालयों और 9 छात्रावासों में स्थापित 99 स्मार्ट बोर्ड, जो पहले सीमित उपयोग में थे, अब इस डिजिटल मॉडल के जरिए सक्रिय रूप से उपयोग किए जाएंगे। प्रशासन का मानना है कि इससे सरकारी स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम की अवधारणा को व्यवहारिक रूप दिया जा सकेगा। इस व्यवस्था का एक उद्देश्य यह भी है कि जहां शिक्षकों की कमी या अनुपस्थिति जैसी चुनौतियां हों, वहां विद्यार्थी डिजिटल माध्यम से पढ़ाई जारी रख सकें। साथ ही मोबाइल को केवल मनोरंजन के बजाय सीखने के साधन के रूप में उपयोग करने की सोच को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
इस पहल को लागू करने में राज्य शिक्षा केंद्र से जुड़े ओआईसी विनोद द्विवेदी, जिला शिक्षा अधिकारी राजेश अग्रहरी और जिला परियोजना समन्वयक पी.एन. तिवारी की भूमिका भी बताई गई है।
आज तक 24 न्यूज़ के प्रशासन से सवाल
1. जिन बच्चों के पास स्मार्टफोन, इंटरनेट या डिजिटल संसाधन उपलब्ध नहीं हैं, उनके लिए “स्कैन एंड लर्न” मॉडल को समान रूप से लागू करने की क्या व्यवस्था है?
2. क्या यह पहल शिक्षकों की कमी का स्थायी समाधान मानी जा रही है, या डिजिटल व्यवस्था केवल सहायक माध्यम होगी?
3. इस मॉडल की सफलता मापने के लिए क्या कोई स्पष्ट मानक तय किए गए हैं—जैसे सीखने का स्तर, उपस्थिति, परीक्षा परिणाम या डिजिटल उपयोग का वास्तविक डेटा?
